बीसलपुर। प्रेमिका के बुलाने पर उसके घर गए किशोर की प्रेमिका के परिजनों ने बंदकर पिटाई की। इसके उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। तीन लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।
दियोरिया निवासी संजीव कुमार के पुत्र शिवम (17) का कस्बे की ही एक 15 वर्षीय किशोरी के साथ लंबे समय से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। किशोरी के घर वालों को जब पता चला तो उन्होंने दोनों के मिलने पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद भी दोनों चोरी-छिपे मिलते रहते।
परिवार वालों का आरोप है कि साजिश के तहत शुक्रवार की रात करीब 12 बजे परिजनों ने किशोरी से कॉल करवाकर शिवम को अपने घर बुला लिया। घर पहुंचते उसे कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद उसकी जमकर पिटाई की गई। जिससे वह बेहोश हो गया।
सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस शिवम को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलसंडा लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने आरोपी पक्ष के तीन लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। हिरासत में लिए गए लोगों में एक महिला भी शामिल है।
सीओ प्रतीक दहिया ने भी दियोरिया कोतवाली पंहुच कर हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की। उन्होंने किशोर के परिजनों से भी मामले की जानकारी जुटाई। सीओ प्रतीक दहिया ने बताया कि तहरीर मिलते ही रिपोर्ट दर्ज कर ली जाएगी।
बेसुध हुआ किशोर तो खुद ही डायल 112 पर की कॉल
- जानकारी के बाद दियोरिया थाने पहुंचे परिजनों को खून से लथपथ मिला किशोर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलसंडा/पीलीभीत। पिटाई के बाद किशोर के बेसुध होने पर प्रेमिका के परिजनों ने ही डायल 112 को सूचना देकर बुलाया। पुलिस किशोर को थाने ले आई। जानकारी के बाद शनिवार सुबह छह बजे जब परिजन थाने पहुंचे तो किशोर खून से लथपथ मिला। अस्पताल पहुंचने पर उसकी मौत हो गई। पिता ने षडयंत्र के तहत बेटे की हत्या करने का आरोप लगाया है।
शिवम के चाचा रमेश ने बताया कि शनिवार सुबह छह बजे पुलिस ने उन लोगों को कॉल करके बुलाया। जब वह थाने पहुंचे तो शिवम खून से लथपथ था। उसने धारदार हथियार से वार करने की बात बताई। हालत बिगड़ने पर पुलिस के साथ परिजन उसको लेकर बिलसंडा सीएचसी पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिटाई से शिवम के बेसुध होने के बाद प्रेमिका के परिजनों ने ही कॉल करके उसे थाने भिजवाया। उन्होंने कार्रवाई की मांग की है।
समय पर मिलता उपचार तो बच सकती थी जान
परिजनों ने बताया कि सुबह थाने से कॉल आने के बाद वह लोग जब वहां पहुंचे तो शिवम को उपचार के लिए ले जाया गया। सवाल यह भी है कि जब उसकी हालत गंभीर थी तो पुलिस तुरंत उसे उपचार के लिए लेकर क्यों नहीं गई। उन्होंने बताया कि अगर समय पर उपचार मिलता तो शायद शिवम की जान बच सकती थी।