बाघ के हमले में वाचर की मौत के बाद वन संरक्षक ने बुधवार को वाचरों के साथ बैठक कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि अब कोई भी वनकर्मी अकेले गश्त करने नहीं जाएगा। चार या छह लोगों की टीम बनाकर गश्त की जाएगी। इसके अलावा वाचरों को सुविधाएं व वाचर टावरों को वायरलेस लगाए जाएंगे। बुधवार को बराही गेस्ट हाउस में वाचरों को संबोधित करते हुए वन संरक्षक ने कहा अब जंगल या इसके बाहर हुई घटनाओं पर हम जनता से खेत खलिहान पर अकेले न जाने की बात कहते रहे हैं, लेकिन खुद ऐसा नहीं करते। शायद इसी के चलते हमने अपना साथी खो दिया। मगर अब जंगल में कोई भी वनकर्मी गश्त पर अकेले नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि कम से चार वाचर अथवा दो वाचर, एक वनरक्षक ओर एक फारेस्ट गार्ड मिलकर गश्त करेंगे। घटना की असल वजह आग में लापरवाही के कारण हुई है। नियमानुसार निर्धारित क्षेत्र में आग लगाकर शाम को अंधेरा होने से पहले संबंधित व्यक्ति को उसे बुझाने के बाद ही हटना चाहिए, लेकिन अक्सर आग लगाने के बाद उसे बुझाने मेें दूरी की जाती है अथवा उसे यूं ही छोड़ दिया जाता है। यदि वनकटी की आग समय रहते बुझा ली गई होती तो ताराचंद्र को वहां नहीं भेजा जाता।