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Pilibhit News: सजा पुलिस वालों को नहीं, हमें मिली हैं, ताउम्र की

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Tale of pain... 'Not the policemen, we are facing the punishment, of life'
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नरेंद्र की पत्नी बोलीं- हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं पुलिस वालों ने
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मां से छीनकर ले गए थे नरेंद्र को, पलकें ऊपर उठाने की भी नहीं दी इजाजत
पीलीभीत। पुलिस वाले नहीं सजा तो हम भुगत रहे हैं, ताउम्र की। पति की लाश तक देखने को नहीं मिली। मां से छीनकर ले गए थे उन्हें, पलकें तक ऊपर उठाने की इजाजत नहीं दी थी...। यह कहना है जसवंत कौर का। वर्ष 91 में एनकाउंटर के नाम पर मारे गए दस सिखों में इनके पति नरेंद्र सिंह भी शामिल थे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को जब अमरिया के पस्तौर निवासी जसवंत कौर से बात की गई तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। बोलीं कि उनके पति नरेंद्र सिंह मां जोगेंद्र सिंह के साथ गए थे। जोगेंद्र कौर ने लौटकर उन्हें बताया कि कछला पुल के पास पुलिस वालों ने गाड़ी रोककर नरेंद्र को उतार लिया। वह रोकती रहीं, हर प्रयास बेकार गया। पुलिस वालों को देखने लगीं तो सबको हिदायत दी कि आंखें नीचे कर लो, कोई आंख उठाकर ऊपर नहीं देखेगा। इसके दो दिन बाद अखबार देखकर पता चला कि नरेंद्र को पुलिस वालों ने मार डाला है। लाश तक नहीं दी। दो छोटे बच्चे थे, कच्चे मकान में रहकर कैसे गुजर बसर की है, किसे बताएं। सरकार ने कोई मदद नहीं की। कोई उनका हाल देखने या दर्द जानने तक नहीं आया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर जसवंत कौर बोलीं- अब क्या कहें, किसे सजा मिली और किसको नहीं। फिर जख्मों को हरा करने से क्या फायदा। पूरी जिंदगी तबाह हो गई। जसवंत के दोनों बच्चे उत्तराखंड में मजदूरी करते हैं। जैसे-तैसे परिवार चल रहा है।
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