गांव नौगवां निवासी डोरीलाल ने बताया कि वह एक सोनार की दुकान पर मजदूरी करते हैं। उनका बड़ा पुत्र दुर्गाप्रसाद ठेले से फेरी कर सब्जी बेचता है। उनके छप्परपोश मकान के ऊपर से दो दर्जन से अधिक केबिलें निकली हैं। शनिवार की रात करीब दो बचे केबिलों में स्पार्किंग हो गई। स्पार्किंग के दौरान गिरी चिंगारी से उसके घर में आग लग गई। आग लगने की जानकारी तब हुई जब आंच लगी। आंख खुलने पर लपटें देखकर उनके होश उड़ गए। वह किसी तरह सो रहे बच्चों को उठाकर घर से बाहर भागे और अपनी जान बचाई। आग बुझाने व सामान निकालने के प्रयास में वह और उनका पुत्र दुर्गाप्रसाद झुलस गया। चीखपुकार पर आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारियों ने आपूर्ति बंद नहीं की। इस अग्निकांड में मकान बनाने के लिए रिश्तेदारों से उधार लेकर एकत्र किए गए 50 हजार रूपये, कपड़े, अनाज, बिस्तर, पंखा, रंगीन टीवी, सीडी, एक मोबाइल, गैस चूल्हा, चार कुर्सी समेत करीब डेढ़ लाख का सामान जल गया।