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Pilibhit News: छह हजार छुट्टा पशु गोआश्रय स्थलों में...जिले के लोग फिर भी सुरक्षित नहीं

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पीलीभीत शहर के नौंगवा चौराहे के पास खड़े छुटृा पशु।संवाद
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पीलीभीत। करीब छह हजार पशुओं के 58 गोआश्रय स्थलों में होने के बाद भी जिले के लोग सुरक्षित नहीं हैं, अब भी सैकड़ों पशु सड़कों पर हैं। बावजूद इसके उनको पकड़ने की कोशिश नहीं की जा रही है। फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही पशु लोगों की जान के दुश्मन भी बने हुए हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हैं।
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मुख्यमंत्री का छुट्टा पशुओं को लेकर सख्त निर्देश है कि उन्हें पकड़कर गोआश्रय स्थलों में भिजवाया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं और किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। इस आदेश के बाद कुछ दिनों तक तो छुट्टा पशुओं के खिलाफ अभियान चलाया गया, लेकिन अब फिर जिम्मेदार शांत होकर बैठ गए हैं। ऐसे में आए दिन लोग छुट्टा पशुओं की चपेट में आ रहे हैं। किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है।
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के 58 गोआश्रय स्थल संचालित हैं। जिनमें करीब छह हजार पशु संरक्षित हैं। यह और बात है अब भी जिले की सड़कों और गांवों में हजारों छुट्टा पशुओं को घूमते देखा जा सकता है।
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नगर पालिका क्षेत्र में नहीं है गोआश्रय स्थल
एक और छुट्टा पशुओं को लेकर मुख्यमंत्री इतने गंभीर हैं, वहीं अब तक नगर पालिका क्षेत्र में एक भी गोआश्रय स्थल नहीं बन सका है। इसके चलते शहर में छुट्टा पशुओं का विचरण थम नहीं पा रहा है। किसी वीआईपी के आने पर ही अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ा जाता है और यहां से उन्हें देवीपुरा भेज दिया जाता है। इसके बाद स्थिति फिर जस का तस हो जाती है। बता दें कि कुछ ऐसी ही स्थिति नगर पंचायत नौगवां पकड़िया की भी है। यहां भी मंडी में करीब 200 पशु घूमते देखे जा सकते हैं।




एक माह में हो चुकी है आठ लोगों की मौत

सड़कों पर घूमने वाले छुट्टा पशुओं की चपेट में आने और उनके हमला करने से एक माह में आठ लोगों की मौत हो चुकी है। यहीं नहीं कई लोग घायल भी हुए हैं। इसमें सोमवार को ही घुंघचाई के ग्राम कबीरपुर कसगंजा निवासी वृद्ध कालीचरन की सांड़ों के झुंड के हमला करने से जान चली गई थी।





समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। अभी गांवों में बारिश का पानी भरा होने के कारण अभियान नहीं चल रहा है। जल्द ही इसे फिर चलाया जाएगा। छुट्टा पशुओं को लेकर विभाग गंभीर है। सड़कों पर कितने पशु हैं इसका अनुमान नहीं है।
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-डॉ. अरविंद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

पीलीभीत शहर के नौंगवा चौराहे के पास खड़े छुटृा पशु।संवाद

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