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Pilibhit News: शारदा नदी कटान कर मचा रही तबाही, अब तक 50 एक जमीन निगली

Wed, 02 Aug 2023 11:57 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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गांव चंदिया हजारा के समीप कटान करती शारदा नदी । संवाद
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पूरनपुर। गांव चंदिया हजारा के समीप शारदा नदी बुधवार को भी तेजी से कटान करती रही। पांच किसानों की नौ एकड़ गन्ने की फसल नदी में समा गई। नदी कटान कर अब तक जंगल और किसानों की करीब 50 एकड़ जमीन निकल चुकी है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड गंभीर नहीं है। अफसर नदी किनारे दलदल होने का तर्क देकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इससे ग्राामीणों में रोष है। उनका कहना है कि कटान से पहले बचाव के ठोस इंतजाम होते तो इतनी तबाही न होती।
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शारदा नदी ने पिछले साल भी गांव चंदिया हजारा और राहुलनगर के समीप कटान किया था। कई एकड़ जमीन नदी में समा गई थी। इस बार भी करीब एक महीने से गांव चंदिया हजारा के समीप नदी कटान कर रही है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से शुरू में तो कोशिश की गई। वायरक्रेट भी लगवाए गए, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर ये नदी में बह गए।
इसके बाद लखनऊ से बांस मंगवाकर कई बार में बंबूक्रेट लगाए गए। यही भी नदी में समा गए और कटान लगातार तेजी से होता रहा। बुधवार को गांव के तपन हलधर, प्रेम मंडल, शंकर सरकार, अंगूर सरकार का तीन-तीन एकड़ खेत में खड़ी गन्ने की फसल नदी में समा गई। नदी अब कविता मंडल, संजय मंडल, तारापद, तारक मिस्त्री और बुद्ध मिस्त्री के खेतों में कटान कर रही है। इनमें कविता मंडल का तीन एकड़ में ढ़ाई एकड़, संजय मंडल का तीन एकड़ में ढ़ाई एकड़, तारापद का तीन एकड़, तारक मिस्त्री का डेढ़ एकड़ में एक एकड़, बुद्ध मिस्त्री को डेढ़ एकड़ में एक एकड़ गन्ने की फसल तबाह हो चुकी है।
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तेजी से हो रहे कटान पर बाढ़ खंड के अफसर, कर्मचारी नदी किनारे दलदल होने से बचाव कार्य न हो पाने का तर्क देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इससे लोगों में रोष है। गांव के लोगों का कहना है कि अगर कटान रोकने के लिए कुछ महीने पहले से कोशिश की जाती, तब कटान को रोका जा सकता था। ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि नदी अब तक 25 एकड़ जंगल और 25 एकड़ किसानों की जमीन लील चुकी है।
बाढ़ खंड अगर कटान रोकने के लिए काम शुरू कराए तो गांव के लोग कारसेवा के लिए तैयार हैं, लेकिन बुधवार को बारिश के चलते कटान रोकने का कोई काम नहीं हो सका। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता डीएन शुक्ला ने बताया कि कटान रोकने को पर्याप्त व्यवस्था की गई है, लेकिन नदी किनारे दलदल होने से धीमी गति से ही बचाव के काम हो पा रहे हैं।
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