फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामलीला रोड : गड्ढों में गुम हो गई सड़क, आए दिन हो रहे हादसे

Fri, 18 Aug 2023 12:08 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
विज्ञापन
शहर की रामलीला रेलवे क्रांसिग जाने वाली रोड पर हुए बडे बडे गड्डे । संवाद
विज्ञापन
पीलीभीत। शहर के उपाधि कॉलेज चौराहे से असम हाईवे को जोड़ने वाला मार्ग इस कदर बदहाल है कि इससे गुजरना खतरे से खाली नहीं रह गया है। सड़क गहरे गड्ढों में गुम हो गई है। आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी खामोश है।
विज्ञापन

उपाधि कॉलेज से रेलवे फाटक होते हुए असम रोड तक जाने वाली सड़क यूं तो काफी समय से खस्ताहाल है। पहले सड़क में छोटे गड्ढे थे, लेकिन पैच वर्क न कराए जाने से अब बारिश में ये जानलेवा हो गए हैं। गड्ढों को देखकर सड़क तालाब लगने लगी है। जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि नगर पंचायत भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते राहगीर तो परेशान हैं ही, सड़क किनारे के दुकानदारों का जीवन भी नरक बन गया है। गड्ढों में भरा पानी वाहनों के गुजरने से दुकानों में आ जाता है। यही नहीं गड्ढे हादसे का कारण भी बन रहे हैं। आए दिन यहां से गुजरने वाले ई-रिक्शा गड्ढों में फंसकर पलट रहे हैं। इससे यात्री चोटिल हो रहे हैं। कई बार लोगों ने इसे लेकर जिम्मेदारों से शिकायत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
विज्ञापन

00

एक साल से गड्ढों में हिचकोले खा रहे लोग
एक साल से इस सड़क पर कोई काम नहीं हो सका है। पहले तो सड़क ही तीन विभागों के बीच फंसी थी। गन्ना विभाग वाले मंडी और मंडी वाले इसे गन्ना विभाग की बता रहे थे। बाद में पता चला कि सड़क नौगवां नगर पंचायत की है, लेकिन नौगवां नगर पंचायत ने इस सड़क पर अभी तक कोई काम नहीं कराया है।

गड्ढों में रोड़े डलवाकर और बढ़ा दी मुसीबत
करीब तीन माह पहले नगर पंचायत नौगवां पकड़िया की ओर से गड्ढों को भरने के लिए उनमें रोड़े डलवा दिए गए। रोड़ा भी कहीं-कहीं ही डाला गया। बड़े वाहनों के गुजरने से रोड़ा गड्ढों में टिक नहीं सका और टूटकर पानी में ही मिल गया। अब यह दलदल बनकर राहगीरों को और तकलीफ दे रहा है।


वर्जन-
इस सड़क को बनाने में एक करोड़ का खर्च आएगा। नगर पंचायत 40 लाख से ज्यादा एक सड़क पर खर्च नहीं कर सकती है। इसको लेकर शासन से दिशा निर्देश मांगे गए हैं। - संतोष चतुर्वेदी, अधिशासी अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें