बारिश व अधूरी नाला सफाई ने मुसीबत में डाला
पालिका प्रशासन द्वारा पानी निकासी के नाम पर ढाई लाख की आबादी वाले शहर में 21 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद कई नाले चोक पड़े हैं। यही वजह है कि मानसून की पहली बारिश ने शहर के हालात बिगाड़ दिये हैं। बुधवार से शुरू हुई बरसात शुक्रवार भी पूरे दिन रुक रुककर होती रही। चोक नाले, नालियों के चलते निचले स्थानों पर जलभराव हो गया। लोगों को कीचड़युक्त जलभराव के बीच से गुजरना पड़ा। स्कूल कॉलेजों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक बारिश का असर देखा गया। स्कूलों में बच्चों और कार्यालयों में फारियादियों की संख्या भी न के बराबर रही। वहीं मजदूरी पेशा लोगों के लिए भी बारिश मुसीबत बनी रही। सीजन की पहली बारिश ने गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत तो दी, लेकिन जलभराव व कीचड़ जैसी अव्यवस्था का भी लोगों को सामना करना पड़ा। समस्याओं से निपटने के लिए पालिका प्रशासन द्वारा किए गए इंतजाम बेअसर साबित हो रहे हैं। शहर में नाला सफाई के नाम पर पालिका प्रशासन द्वारा 21 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद शहर में कई स्थानों पर जलभराव व नालों से निकाली गई सिल्ट से दो चार होना पड़ा। हालांकि बृहस्पतिवार की अपेक्षा शुक्रवार को कम बारिश हुई। इसके बावजूद शहर के कुछ निचले स्थानों पर लोगों को जलभराव से जूझना पड़ा। सबसे खराब हालात सीएमओ कार्यालय के आसपास रहा। नालों से निकाली गई सिल्ट बारिश के चलते सड़कों पर फैल गई। हालांकि पालिका द्वारा बारिश के दौरान ही अल्लाहू मियां की मजार, ज्वाला देवी मंदिर के समीप फैल रही सिल्ट को उठवाना पड़ा।