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Pilibhit News: वीराने में रैन बसेरा... जहां कोई नहीं आता-जाता

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रेन बसेरे की धंसा फर्श। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। सर्द रातों में कोई खुले आसमान के नीचे न सोए, इसके लिए शासन ने 2.14 करोड़ रुपये की लागत से शहर के एक कोने में 100 बेड के आश्रय स्थल (रैन बसेरा) का निर्माण कराया था। दिसंबर 2021 में लखनऊ के एनजीओ हेल्पिंग यूथ फाउंडेशन को इसे संचालित करने का जिम्मा दिया गया। एनजीओ ने यहां पांच कर्मचारी तैनात कर दिए। इसके अलावा कुछ नहीं किया। अब हाल यह है कि रैन बसेरे में महज एनजीओ के चार-पांच वर्कर ही रह रहे हैं, जिन्हें महीनों से मानदेय नहीं मिला है। सफाई कर्मी काम छोड़कर जा चुका है। सामान लेने के लिए बजट नहीं है। जिम्मेदारों ने अब तक कोई सुध ही नहीं ली है।
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नकटादाना स्थित केजीएन कॉलोनी के अंदर एक कोने में पिछले साल ही तीन मंजिला रैन बसेरा बनाया गया है। रैन बसेरा ऐसी जगह बनाया गया है कि इसे खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अधिकतर जरूरतमंदों को पता ही नहीं कि रैन बसेरा कहां है। शनिवार को जब रैन बसेरा की हकीकत परखी गई तो परिसर में दो कार खड़ी मिलीं। जानकारी करने पर पता चला कि कॉलोनी के लोगों ने कारें यहां पार्क की हैं। एक तरफ फर्श धंसा हुआ था तो सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह चौपट थी। दूसरी मंजिल पर कूड़े का ढेर लगा था। तीसरी मंजिल के शौचालय गंदे पड़े थे। दीवारों पर प्लास्टर नहीं था, कुछ कमरों में बिस्तर लगे थे तो कुछ में सिर्फ बेड पड़े थे। जानकारी करने पर मैनेजर ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट का निरीक्षण होने वाला है। इसीलिए वह खुद सफाई कर रहे हैं, सफाई कर्मी को मानदेय नहीं मिला, इसलिए वह काम छोड़कर चला गया है।
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जरूरतमंदों को पता ही नहीं शहर में एक रैन बसेरा भी है
रैन बसेरे की क्षमता 100 बेड की है। मगर नगरपालिका परिषद और एनजीओ की ओर से कोई प्रचार-प्रसार नहीं कराया गया है, ऐसे में जरूरतमंदों को पता ही नहीं कि शहर में कोई रैन बसेरा भी है। शहर से काफी दूर एक कोने में होने के कारण भी जरूरतमंद यहां नहीं पहुंच पाते।
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मानदेय तक नहीं मिल रहा
मैनेजर देवेंद्र कुमार ने बताया कि एक दिसंबर 2021 को उन्हें रैन बसेरे में लगाया गया। उनके अलावा दो पुरुष, एक महिला केयरटेकर, एक सफाई कर्मी को एनजीओ की ओर से लगाया गया। तीन माह का मानदेय देने के बाद एनजीओ के अधिकारियों ने इधर मुड़कर नहीं देखा। आलम यह है कि अब फोन भी रिसीव नहीं कर रहे हैं। सफाई के सामान को लाने के लिए बजट तक नहीं है। दो माह पहले सफाई कर्मी भी भाग गया। हाल यह है कि घर से राशन लाने के बाद यहां रह रहे हैं। एनजीओ का कोई अधिकारी यहां नहीं आता।
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रैन बसेरे में अव्यवस्थाओं को लेकर एनजीओ को नोटिस दिया गया है। अगर व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं कराई गईं, तो एग्रीमेंट निरस्त कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी और संस्था से या फिर नगरपालिका से रैन बसेेरे को संचालित किया जाएगा।
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- पूजा त्रिपाठी, ईओ नगर पालिका
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