बीते साल सात और उससे पहले सत्र में महज दो ही विदेशी पर्यटक आए थे
2014 में मिला था पीटीआर का दर्जा, पर्यटकों के लिए नहीं कोई खास इंतजाम
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व बनने के बाद भी पीलीभीत का जंगल विदेशी पर्यटकों को नहीं लुभा पा रहा है। विदेशी पर्यटकों के आने-जाने और ठहरने के पर्याप्त साधन न होना इसकी एक खास वजह हो सकती है। वहीं पीटीआर के अधिकारियों ने भी पिछले आठ साल में ऐसा कुछ खास नहीं किया, जिससे यहां विदेशी पर्यटक आएं। जंगल के आसपास क्षेत्र तक विकसित नहीं किया गया।
नौ जून 2014 को 73 हजार 24.98 हेक्टेयर में फैले पीलीभीत के विशालकाय जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। उम्मीद थी कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) बनने के बाद यहां स्वदेशी के अलावा विदेशी पर्यटक भी आएंगे। पीटीआर बनने के बाद पहले पर्यटन सत्र में 10 विदेशी पर्यटक यहां आए भी। उम्मीद जागी कि पीटीआर में अब विदेशी पर्यटक आएंगे और आय भी बढ़ेगी। हालांकि पीटीआर के अधिकारी इसमें कामयाब नहीं हो सके। 2015 में 13, 2016 में 15, 2017 में 16, 2018 में 23, 2019 में 13, 2020 में 2 और 2021 में महज सात विदेशी पर्यटक ही पीटीआर आए। आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि विदेशी पर्यटकों को अभी पीटीआर नहीं भा रहा है।
विदेशी पर्यटकों के न आने की मुख्य वजह है कि उन्हें माकूल सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उनके ठहरने, खाने-पीने की उचित व्यवस्था नहीं है। पीटीआर जाने के लिए शाम को यहां कोई साधन नहीं है। फिर पीटीआर के आसपास कोई होटल भी नहीं है, जिससे कि पर्यटक वहां रात बिता सकें। 40 किलोमीटर दूर शहर में आकर होटल लेना पड़ता है। बाहर से आने वाले सैलानियों के साथ समस्या यह है कि जंगल में अंदर हट में ठहरते हैं तो यहां उनके मुताबिक खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है और जंगल के बाहर भी कुछ नहीं।
बाघ ही आकर्षण का केंद्र और वो भी दिखते नहीं
टाइगर रिजर्व होने के कारण अधिकांश पर्यटक यहां बाघों को देखने आते हैं। वह कई दिन रुकते भी हैं, मगर बाघ का दीदार नहीं होता। इससे उन्हें मायूसी हाथ लगती है और दूसरी बार पर्यटक नहीं आता। पीटीआर में 2017 से 2020 से पहले बाघों की संख्या 44 थी। जो बढ़कर 65 हो गई। बाघों के संरक्षित एरिया के लिए पीटीआर विश्व पटल पर भी सामने आया। एनटीसीए की और पीटीआर प्रशासन को पुरस्कार भी दिया गया। बावजूद इसके पर्यटन सत्र के दौरान पर्यटकों को बाघ नहीं दिखते। वजह यह है कि पीटीआर के अधिकारियों ने ऐसा कोई रूट नहीं बनाया जिस पर बाघ दिख सकें।
पीटीआर बनने के बाद उम्मीद जागी थी होटल व्यवसाय को पंख लगेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। चार-पांच साल पहले दो-तीन विदेशी पर्यटक होटल में रुके थे। तब से कोई नहीं आया। प्रशासन को चाहिए कि जंगल के आसपास के क्षेत्र को विकसित करें, जिससे कि विदेशी पर्यटक भी आ सकें।
- अनिल अग्रवाल, होटल निर्मल
पर्यटन सत्र के दौरान कोई बिजनेस नहीं मिलता। जो पर्यटक आते हैं वह अपनी गाड़ी से ही आते हैं। शहर में पिछले कुछेक साल से पीटीआर की अपनी गाड़ियां हो गई हैं। इसलिए ट्रैवल्स वालों को तो इससे कोई फायदा नहीं। दूसरी बात यह कि जंगल में अंदर गाड़ी जा नहीं सकती।
- अतुल अग्रवाल, श्रीश्याम ट्रैवल्स
कब कितने आए पर्यटक, कितनी हुई इनकम
टाइगर रिजर्व से पहले
वर्ष- देशी पर्यटक विदेशी पर्यटक- इनकम
2011-12 13003 00 404009
2012-13 12222 00 380800
2013-14 11135 00 586400
टाइगर रिजर्व के बाद
2014-15 14172 10 1769850
2015-16 17566 13 2966376
2016-17 16360 15 3750460
2017-18 14887 16 3206938
2018-19 15885 23 3672935
2019-20 7122 13 1729976
2020-21 12389 02 2607205
2021-22 18745 07 4509170