सुखविंदर के भाई पप्पू और बहनोई बबलू ने उससे न्यायालय में तारीख के दौरान मुलाकात की थी। वहां उसने मंगलवार को मां से मिलने की इच्छा जाहिर की थी। जिस पर भाई और बहनोई ने मां से मुलाकात करवाने का मंगलवार को आश्वासन भी दिया था।
मां को रो-रोकर बुरा हाल
मंगलवार को मां को मुलाकात करने आना भी था लेकिन देर हो जाने के कारण वह मुलाकात करने नहीं आ सकीं। दोपहर एक बजे उन्हें बेटे की मौत की खबर मिली। मां प्रेमादेवी पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचकर रो-रोकर जेल कर्मियों से अपने बेटे से मिलने की बात दोहराने लगीं। मृतक के पिता की पूर्व में मौत हो चुकी है। मृतक के परिवार में उसकी मां प्रेमादेवी, भाई विजय, पप्पू, हरिचंद्र और बहन राखी हैं। मृतक तीसरे नंबर का था।
दो दिन बाद ही थी जमानत की तारीख
परिजनों ने बताया कि सोमवार को जब वे लोग मुलाकात कर गए, तो उन्होंने 22 तारीख को जमानत की बात बताई थी। किसी तरह की अनहोनी की आशंका नहीं लग रही थी। इसके बाद भी सुखविंदर ने ऐसा कदम क्यों उठाया, समझ नहीं आ रहा।
परिजनों को हत्या की आशंका
मृतक के चाचा हरिप्रसाद ने फोन पर बताया कि थाना माधोटांडा क्षेत्र के गांव की एक महिला उसकी रिश्तेदार है। जिसका ससुर कुछ समय पूर्व दहेज हत्या में जेल में बंद रहा था। महिला उनके भतीजे से मुलाकात करने आया करती थी। जिसका वह विरोध करता था। वह कई बार उनके भतीजे को जेल के अंदर ही मरवाने की धमकी दे चुके थे।
जेल अधीक्षक राजे्श पांडेय ने बताया कि जिला कारागार में बंदी ने आत्महत्या की है। अब तक की जांच में आत्महत्या करने का कारण प्रकाश में नहीं आया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।