जल प्रदूषण देश के सामने खड़े बड़े संकटों में से एक है। इसका सबसे बड़ा स्रोत है, बिना ट्रीटमेंट किया सीवेज का पानी। शहर के मैकेनिक, गैराज, वाशिंग सेंटर वाले बरसों से खुलेआम ग्रीस व तेल मिश्रित पानी नालों के जरिए नदी में बहा रहे हैं और यही प्रदूषित जल सतह से गुजरकर भूजल में जहर घोल रहा है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने फीलखाना से निकलकर देवहा में गिरने वाले नाले व उससे होने वाले नुकसान की पड़ताल की। नगर पालिका के जल कल विभाग के आंकड़ों की बात करें तो ढाई लाख की आबादी वाले इस शहर में मात्र 265 कामर्शियल उपभोक्ता हैं, जो जलकर के दायरे में आते हैं, लेकिन हकीकत कही जुदा है। शहर में 35 से अधिक कार वाशिंग सेंटर, करीब 70 मैकेनिकल वर्कशॉप, दस बड़े होटल, 30 अस्पताल व नर्सिंग होम समेत 30 राईस मिल व अन्य औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इनमें से अधिकांश पालिका द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी के अलावा सबमर्सिबल पंपों से निकले जा रहे पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं और बदले में यह केमिकल युक्त दूषित पानी नाले नालियों में बहा रहे हैं। जो नालों से होता देवहा नदी में पहुंच रहा है।