बीसलपुर (पीलीभीत)। युवक की मौत के मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज परिजनों ने पूर्व में ही आत्मदाह की चेतावनी दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे हल्के में लिया। बृहस्पतिवार को यह लोग लखनऊ स्थित विधान भवन के सामने सामूहिक आत्मदाह करने पहुंचे। जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर बाद में रिहा कर दिया।
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी का कोतवाली क्षेत्र के ही एक गांव के रेलवे हाॅल्ट पर शव फंदे से झूलता मिला था। मृतक के परिजनों ने युवक की हत्या का आरोप लगाया था। कार्रवाई से असंतुष्ट परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को हाईवे पर रखकर जाम लगाया था।
मामले में पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर अरुण राना, शिवम राना, जतिन राना, सचिन राना, मिथुन राना, विपिन मौर्य, छेदा लाल मौर्य और अखिलेश मौर्य को नामजद किया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग आने पर पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में तरमीम कर दिया था। इसके अलावा नामजद आरोपी में एक की मौत की बात सामने आने पर विवेचक द्वारा उसका नाम रिपोर्ट से निकाल दिया था। इसके अलावा आरोपियों में एक अधिवक्ता भी शामिल था। जिसपर अधिवक्ताओं ने अफसरों से मिलकर साथी अधिवक्ता को निर्दोष बताकर उसका नाम रिपोर्ट से निकालने की मांग की थी। वहीं परिजन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की लगातार मांग करते आ रहे हैं, लेकिन पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही थी।
इसपर तीन दिन पूर्व परिजनों ने वीडियो जारी कर लखनऊ जाकर विधान भवन के सामने सामूहिक आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। इसी के चलते बृहस्पतिवार को परिजन लखनऊ पहुंचे। जिन्हें वहां की पुलिस ने गिरफ्तार कर बाद में रिहा कर दिया। जानकारी के बाद क्षेत्रीय पुलिस लखनऊ के लिए रवाना हो गई। कोतवाल संजीव शुक्ला ने बताया की विवेचना अभी पूरी नहीं हो पाई है। विवेचना पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है। संवाद