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खेलों से खिलवाड़...कॉलेजों की हिस्सेदारी नहीं

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पिछले सप्ताह गांधी स्टेडियम में हुई हॉकी प्रतियोगिता में ठीक से व्यवस्थाएं तक नहीं की गईं। गोलप? - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। खेलों की दुनिया में बुलंदी छूने का ख्वाब देखने वाले खिलाड़ियों के सपने स्कूल-कॉलेज स्तर पर ही चकनाचूर हो रहे हैं। जिन संस्थाओं में वह पढ़ रहे हैं वो उन्हें खेलों के मंच तक आने का मौका ही नहीं दे रहे हैं। हाल ही में हुईं माध्यमिक विद्यालयों की जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कहने को जिले में 170 इंटर कॉलेज हैं, जबकि प्रतियोगिता में महज 15 इंटर कॉलेजों ने ही हिस्सा लिया।
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यूपी बोर्ड का खेल कैलेंडर जारी हो चुका है। शासन के निर्देश हैं कि माध्यमिक कॉलेजों में हर विद्यार्थी को अनिवार्य रूप से कम से कम दो खेलों में हिस्सा लें। ये भी निर्देश हैं कि जिन कॉलेजों के विद्यार्थी दो खेलों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, उनकी जांच कराई जाए। प्रतियोगिता से पहले कॉलेजों में खिलाड़ियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाने के भी निर्देश दिए गए, लेकिन हालात ये हैं कि जिला स्तरीय प्रतियोगिता में टीमें तक नहीं पहुंच रहीं।
शनिवार को हुई जिला स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में बालक वर्ग में सिर्फ 15 टीमों ने हिस्सा लिया। बालिका वर्ग में एक भी टीम नहीं आई। इससे पहले हुई हॉकी प्रतियोगिता में भी चार कॉलेजों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता महज ट्रायल बनकर रह गई। तैराकी में भी कुछ ही कॉलेजों के विद्यार्थी शामिल हुए।
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क्रीड़ा शुल्क, शासन से बजट लिया, फिर भी खेलों से दूरी
जिले में राजकीय इंटर कॉलेज 28 और अनुदानित कॉलेजों की संख्या 22 है। इनके अलावा 120 वित्तविहीन कॉलेज कॉलेज है। कक्षा नौ से 12 तक प्रति छात्र साठ रुपये सालाना क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है। छात्रों की संख्या करीब एक लाख है। इस हिसाब से सालाना साठ लाख रुपये ज्यादा सिर्फ क्रीड़ा शुल्क से जमा होता है। पिछले सत्र में शासन ने राजकीय कॉलेजों को खेल मद में 25-25 हजार रुपये का अनुदान दिया। सात लाख रुपये राजकीय कॉलेजों को मिले। बजट होने के बावजूद खिलाड़ियों को न तो उपकरण मिल पाते हैं और न ही खेलों का अभ्यास कराया जाता है। इस बार भी कॉलेजों का यही रवैया है।
इस बार 24 खेलों को किया शामिल
यूपी बोर्ड की खेलकूद प्रतियोगिताएं 23 जुलाई से शुरू हुईं। इस बार इसमें 24 खेल शामिल किए गए। कराटे को भी इस बार तीन वर्ष ट्रायल के रूप में शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा सुब्रतो फुटबॉल, नेहरू हॉकी, तैराकी, डाइविंग एवं वाटर पोलो, ताइक्वांडो, बास्केटबॉल, फुटबॉल, खो-खो, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, राइफल शूटिंग, क्रिकेट, कबड्डी, जिमनास्टिक, हैंडबॉल, बॉक्सिंग, जूडो, तीरंदाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स के इवेंट होंगे।
जिला स्तरीय खेलकूद में कॉलेज बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। शासन के भी निर्देश हैं कि कम से दो खेलों में एक कॉलेज जरूर हिस्सा ले। अगर टीमें नहीं आ रही हैं तो कॉलेजों से बात की जाएगी। - गिरजेश कुमार चौधरी, डीआईओएस
फुटबॉल, हॉकी, तैराकी की प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं। जिले से बहुत कम कॉलेज प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं, जबकि सभी को खेल कैलेंडर के साथ पत्र भी जारी किया जा चुका है। डीआईओएस को अवगत कराया जाएगा। सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक बुलाएंगे, ताकि प्रतियोगिता में कॉलेजों की भागीदारी बढ़े। -राजीव कुमार शुक्ला, जिला क्रीड़ा सचिव
माध्यमिक कॉलेजों की खेल प्रतियोगिताएं शुरू हो गई हैं। कॉलेजों को बढ़ चढ़कर इसमें हिस्सा लेना चाहिए। ज्यादा टीमें शामिल होंगी तभी अच्छे खिलाड़ी मिल सकेंगे। हर कॉलेज छात्रों से क्रीड़ा शुल्क लेता है तो छात्रों को खेल सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। -संतोष कुमार, प्रधानाचार्य ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज
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