गभिया सराय में बाढ़ के पानी में घर डूब गए और अब इस तरह सड़क पर बनाया है ठिकाना।
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। पहाड़ों में लगातार तीन दिन तक हुई मूसलाधार बारिश से तराई क्षेत्र की नदिया उफना गईं। पीलीभीत जिले में शारदा और देवहा नदी के पानी ने भारी तबाही मचाई। सैकड़ों एकड़ फसलें डूब गईं। गांव के गांव खाली हो गए। सौ से अधिक गांव बाढ़ प्रभावित हैं पर प्रशासन ने अब तक 62 गांवों के बाढ़ प्रभावित की श्रेणी में लिया। बाढ़ से बचने के लिए लोगों को पेड़ों, घर की छतों और छप्पर पर बैठकर जान बचानी पड़ी। क्योंकि बाढ़ का इतना पानी बीते पांच दशक में भी नहीं आया। बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को पहली बार एयर लिफ्ट कराया गया। वायुसेना ने बुधवार और बृहस्पतिवार को रेस्क्यू करके 40 लोगों की जान बचाई। इसके अलावा पुलिस, पीएसी, एसडीआरएफ, एसएसबी की रेस्क्यू टीमें अभी तक काम कर रही हैं। बाढ़ से हुई तबाही और फसलों की क्षति का आकलन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह हवाई सर्वे करके मुख्यमंत्री को रिपोर्ट दे चुके हैं। अब किसानों और बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत राशि मिलने का इंतजार है। इस बीच शारदा और देवहा नदी का जलस्तर तो घटा है लेकिन पानी का बहाव कई स्थानों पर इतना तेज है कि खेती की जमीन की मिट्टी बह रही है। फसलें पानी में डूबी हुईं हैं। किसान अपने खेतों में फसलों के बर्बाद होने का मंजर देखकर दुखी हो रहे हैं। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने कहा कि बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। फसलों की क्षति का आकलन 48 घंटे में पूरा किया जाएगा। आकलन होने के बाद क्षतिपूर्ति दिलाई जाएगी। अब तक 69 घर गिरे हैं। चार पशु बहे हैं। सड़कें कटी हैं। इनके बारे में रिपोर्ट मांगी गई है। राहत एवं बचाव कार्य जारी है।