हर माह भर्ती प्रक्रिया के बावजूद नहीं हो पा रहा संकट दूर, स्थानीय मार्गों पर सबसे अधिक स्थिति खराब
पीलीभीत। स्थायी चालकों की कमीं और संविदा चालकों की मनमानी से यहां बसों के संचालन में दिक्कत आ रही है। ऐसे में परिवहन निगम को जहां रोजाना एक लाख रुपये का नुकसान हो रहा है वहीं यात्रियों को भी परेशानी हो रही है।
स्थानीय डिपो के पास 107 बसों का बेड़ा है। इसमें नौ बसें अनुबंधित हैं। लोकसभा चुनाव के चलते करीब 27 बसों को बाहर भेजा गया है। ऐसे में इस समय यहां से फिलहाल 71 बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें दिल्ली के लिए 30, लखनऊ के लिए तीन, हरिद्वार के लिए एक, अलीगढ़ के लिए दो, मथुरा के लिए एक और कानपुर के लिए एक बस संचालित है।
नियमानुसार लंबी दूरी की बसों का संचालन दो चालकों के साथ किया जाना चाहिए, लेकिन पर्याप्त चालक न होने से लंबी दूरी पर भी एक ही चालक बस लेकर जा रहा है। चालकों की कमीं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना तीन से चार बसों का संचालन नहीं हो पाता। इससे निगम को प्रतिदिन करीब एक लाख रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। (संवाद)
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स्थायी चालक हैं नहीं, गैरहाजिर रहते हैं संविदा चालक
विभागीय आंकड़ों की बात करें निगम के पास 24 स्थायी और 147 संविदा चालक है। इसमें 70-80 संविदा चालक हर माह अनुपस्थित रहते हैं। इनको लेकर विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किया जाता है पर स्थिति नहीं सुधरती। कुछ दिन यह लोग ठीक रहते हैं बाद में स्थिति जस की तस हो जाती है।
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स्थानीय मार्गों पर गड़बड़ाया रहता है बसों का संचालन
चालकों की कमीं का सबसे ज्यादा असर स्थानीय मार्गों पर रहता है। निगम के पास जो चालक हैं उनमें अधिकतर को लंबी दूरी की बसों पर भेज दिया जाता है। जो चालक बच जाते हैं उनको स्थानीय मार्गों पर लगाया जाता है। ऐसे में रोजाना ही तीन से चार बसों का संचालन नहीं हो पाता।
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चालकों की कमी को पूरा करने का हो रहा प्रयास
निगम को करीब 40 चालकों की जरूरत है। अप्रैल माह में भी पांच लोगों की भर्ती कर उन्हें प्रशिक्षण के लिए कानपुर भेजा गया है। अब इनके आने का इंतजार किया जा रहा है।
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एक नजर में
कुल बसें-109
अनुबंधित-09
चालक-24
संविदा चालक-147
(करीब 70 से 80 संविदा चालक रहते हैं हर माह गैरहाजिर)
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चालकों की काफी कमी है। इसको लेकर भर्ती प्रक्रिया को भी अपनाया है। कोशिश की जा रही है चालकों की कमीं दूर हो, जिससे बसों का संचालन सही से हो सके। - पवन कुमार श्रीवास्तव, एआरएम