मेडिकल कॉलेज का हाल-बेहाल : रोजाना पहुंच रहे करीब 1500 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलते ही यहां मरीजों की भीड़ उमड़ने लगी है। रोजाना करीब 1500 नए पर्चे बन रहे हैं। बावजूद इसके यहां पर्याप्त डाॅक्टर नहीं हैं, हाल यह है कि पर्चा बनवाने से लेकर डाॅक्टर को दिखाने और दवा लेने तक करीब दो से तीन घंटे लग रहे हैं। यह तब है जब डॉक्टर मरीज को एक मिनट तक नहीं दे पा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलते ही जिले के लोगों के चेहरे खिल उठ थे। मगर यही खुशी अब दिक्कत दे रही है। मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलते ही जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ और बढ़ गई है। अधिकतर लोग इस उम्मीद में सरकारी अस्पताल की तरफ भाग रहे हैं कि अब वहां पहले से ज्यादा अच्छा इलाज मिलेगा।
इसके विपरीत डाॅक्टर व स्टाफ की कमी के कारण उन्हें घंटाें लाइन में लगना पड़ रहा है। चाहे पर्चा बनवाना हो, डॉक्टर को दिखाना हो या फिर दवा लेनी हो, सभी जगह दिक्कत आ रही है। आधे से एक घंटा पर्चा बनवाने में लग रहा है तो डाक्टर के कक्ष में इस कदर लंबी लाइन लग रही है कि नंबर आने में करीब एक घंटा तक लग रहा है।
बावजूद इसके डॉक्टर मरीज का दर्द एक मिनट तक नहीं सुन पा रहे। फिर दवा के लिए एक घंटे अलग से लाइन में लगना पड़ रहा है। मतलब साफ है कि अस्पताल से दवा लेने के लिए दो से तीन घंटे लग रहे हैं।
आए दिन हो रही नोकझोंक
अस्पताल में स्टाफ न होने के कारण आए दिन मरीजों की स्टाफ से नोकझोंक होती है। पर्चा काउंटर पर सबसे ज्यादा दिक्कत आती है। कई बार कुछ लोगों के पर्चे ही नहीं बन पाते। अगर पर्चा बन गया तो जब तक नंबर आता है डाॅक्टर उठ जाते हैं, या फिर दवा काउंटर बंद हो जाता है। ऐसे में परेशान मरीज की स्टाफ से नोकझोंक होती है।
दवा लेना भी किसी युद्ध जीतने से कम नहीं
जिला अस्पताल में जैसे-तैसे पर्चा बनवाकर डाॅक्टर को दिखा लेंगे लेकिन इसके बाद दवा लेना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं है। दरअसल जिला अस्पताल में दवा के लिए दो ही काउंटर है। इसमें एक महिला व दूसरा पुरुष के लिए है। जिस हिसाब से मरीज आ रहे हैं उसको देखते हुए बहुत लंबी लाइन लग रही है। लाइन में जबरदस्त धक्का-मुक्की होती है। कई बार तो झगड़ा तक हो जाता है। एक-आध बार तो लोग लाइन में खड़े-खड़े बेहोश तक हो चुके हैं। बावजूद इसके दवा काउंटर नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।
मरीजों ने बयां किया दर्द
सुबह नौ बजे दवा लेने के लिए पहुंचा। पर्चा बनवाने में ही करीब पौन घंटा लग गया। इसके बाद डॉक्टर कक्ष में भी करीब एक घंटे बाद उन्हें दिखा सका। दवा काउंटर पर भी काफी दिक्कत आई।
-परमेश्वरी दयाल, बिथरा
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बच्चे की दवा लेने के लिए आया था। हर जगह लाइन में घंटों इंतजार करना पड़ा। गर्मी के चलते बच्चे को काफी परेशानी हुई। बाद में किसी तरह दवा मिल पाई।
- नरेंद्र कुमार, ढेरम मड़रिया
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जन्माष्टमी पर ससुराल आया था। सोचा मेडिकल कॉलेज हो गया है यहां अच्छी दवा मिल जाएगी। मगर यहां तो डॉक्टर सही तरीके से देख ही नहीं पा रहे। पूरी बात सुने बगैर ही दवा लिख देते हैं।
- राजू , सदलपुर थाना हाफिजगंज, बरेली।
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इस माह में यह रही ओपीडी
एक सितंबर 1266
दो सितंबर 1521
तीन सितंबर रविवार अवकाश
चार सितंबर 1758
पांच सितंबर 1531
छह सितंबर 1350
जिला अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज बन गया है। इसलिए अब यहां जो कुछ भी कार्य होगा वह मेडिकल कॉलेज के नियमों के मुताबिक होगा। ताकि भविष्य में कोई सवाल न खड़ा हो सके। दवा काउंटर बढ़ाने की सोच रहे हैं लेकिन इसके लिए अनुमति मांगी गई है।
- संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
नरेंद्र कुमार ।
नरेंद्र कुमार ।
नरेंद्र कुमार ।
नरेंद्र कुमार ।