पीलीभीत। जिले में करीब साठ फीसदी से ज्यादा धान काटा जा चुका है, लेकिन सरकारी खरीद का आंकड़ा एक फीसदी तक भी नहीं पहुंच पाया है। ज्यादातर किसान अपना धान राइस मिलों और मंडियों में पहुंचा चुके हैं। किसानों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगे सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं हो रही। मंडियों में लगे सेंटरों पर मानकों का बहाना बना दिया जाता है। ऐसे में वे नकद भुगतान के कारण आढ़तों और राइस मिलों पर अपना धान बेच रहे हैं।
जिले में इस बार 1.35 लाख हेक्टेयर धान का रकबा है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार 7.4 लाख एमटी धान का उत्पादन हो सकता है। हालांकि भारी बारिश होने से उत्पादन पर असर पड़ा है। जिले में इन दिनों धान की कटाई तेजी से हो रही है। पूरनपुर क्षेत्र की बात करें तो निचले इलाकों को छोड़कर बाकी का धान खेतों से निकल चुुका है। पूरनपुर क्षेत्र में लोग गेहूं की बुुआई की तैयारी में जुट गए हैं। बीसलपुर, अमरिया, सदर के आसपास के गांवों में भी धान की कटाई साठ फीसदी से ज्यादा निपट चुकी है।
जिले में एक अक्तूबर से सरकारी खरीद शुरू हुई। 161 क्रय केंद्र बनाए गए। शासन ने इस बार 3.20 लाख एमटी खरीद का लक्ष्य दिया है जबकि अब तक महज 3100 एमटी ही खरीद हो सकी है। अगर यही हाल रहा तो लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।
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सेंटर सूने और मशीनों में हो रही खरीद
सरकारी क्रय केंद्रों पर कागजी खरीद का खेल चल रहा है। पूरनपुर क्षेत्र के कई गांवों में सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए, लेकिन अब वहां खरीद नहीं हो रही। पीओएस मशीनों में कुछ धान चढ़ाया गया है, लेकिन जिस गांव में केंद्र लगा होना दर्शाया गया वहां हकीकत में केंद्र अभी खोला ही नहीं गया है। कई सेंटर प्राइवेट भवनों में बना दिए गए हैं। वहां बैनर तो लगे हैं, लेकिन खरीद वहां भी नहीं हो रही। कहा जा रहा है कि जब किसानों के पास से धान खत्म हो जाएगा, उसके बाद व्यापारियों से साठगांठ करके किसानों से कम कीमत पर लिया गया धान केंद्रों पर चढ़ाया जाएगा।
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इस बार 3.20 लाख एमटी का आया खरीद का लक्ष्य
शासन ने इस बार सरकारी खरीद का लक्ष्य पांच हजार एमटी (मीट्रिक टन) बढ़ा दिया है। पिछले साल 3.15 लाख एमटी का लक्ष्य निर्धारित था जिसके मुकाबले 2.8 लाख एमटी की खरीद हुई थी। इस बार शासन ने 3.20 लाख एमटी का लक्ष्य दिया है। हालांकि मौजूूदा स्थिति को देखकर लग रहा है कि पचास फीसदी खरीद होना भी मुश्किल है।
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क्या बोले किसान
सरकारी खरीद के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं हो रही। मजबूरन किसान अपना धान राइस मिलों और आढ़तियों को बेच रहे हैं। बाद में व्यापारी ही किसानों से खरीदा गया धान क्रय केंद्रों पर चढ़वा देंगे। एमएसपी का लाभ तो वह लोग उठाते हैं। किसानों को क्या मिलता है।
- मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक
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पिछले साल भी यही हुुआ था। गांव वाले सेंटरों में वास्तव में खरीद हुई ही नहीं। जब सेंटरों पर किसानों का धान लिया ही नहीं तो वहां किसका धान तौला गया। इस बार भी यही हो रहा है। गांव में सिर्फ कागजों पर सेंटर लगे हैं। उनकी खरीद कहां हो रही किसी को जानकारी नहीं।
- रवि वर्मा, गांव प्रसादरपुर
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वर्जन
अब तक 3100 एमटी खरीद हो चुकी है। इस बार शासन से 3.20 लाख एमटी का लक्ष्य मिला है। जनवरी तक खरीद प्रक्रिया चलती है। पिछले साल 3.15 लाख एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 2.81 लाख एमटी खरीद हुई थी। त्योहार के बाद अब सरकारी खरीद में तेजी आएगी।
-विकास चंद्र तिवारी, डिप्टी आरएमओ