पीलीभीत। अमरिया के निवार्ड फार्म से मंडी में धान बेचने आए किसान सुखदेव सिंह मायूस बैठे थे। पूछने पर बताया कि सौ क्विंटल धान लेकर आए थे। साफ सुथरा धान था, लेकिन क्रय केंद्र वालों ने मना कर दिया। मजबूरन प्राइवेट में 1650 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से धान बेचना पड़ा। मंडी में आए ज्यादातर किसानों की यही शिकायत रही। कहा कि खेत से निकालकर किसान कहां धान सुखाएं। क्रय केंद्रों पर उनको मानक के नाम पर उनको लौटा दिया जा रहा है।
बृहस्पतिवार को मंडी में जबरदस्त भीड़ रही। सुबह से ही किसानों की भीड़ रही। बीस हजार क्विंटल से ज्यादा आवक रही, लेकिन क्रय केंद्रों से ज्यादा भीड़ आढ़तियों पास दिखी। कीमत भी 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक मिली। सरकारी क्रय केंद्रों के मुकाबले प्राइवेट में कई गुना धान खरीदा गया। ज्यादातर किसानों का कहना था कि क्रय केंद्रों पर उनका धान फेल कर दिया जाता है। ऐसे में किसान क्या करें। कम बारिश के चलते लागत ज्यादा आई और आखिर में ज्यादा बारिश ने धान पर असर डाला है। किसानों से कहा जा रहा धान घर से सुखाकर लाएं। सरकारी नियमों के झमेले में पड़ने के बजाए किसान सीधे प्राइवेट में धान बेचना पसंद कर रहा है।
---
तीस फीसदी से ज्यादा था डैमेज इसलिए नहीं लिया गया किसान का धान
पूरनपुर मंडी में बुधवार को डीएम और किसान नेता बलजिंदर सिंह के बीच काफी विवाद हो गया था। किसान नेता का कहना था कि तीन फीसदी डैमेज होने के बावजूद उनका धान क्रय केंद्र पर लेने से मना कर दिया गया। खरीद अधिकारी राम सिंह गौतम ने बताया कि मंडी की कमेटी ने गुणवत्ता की जांच की थी। किसान का धान तीस फीसदी डैमेज था इसलिए खरीद नहीं की गई। किसान के आरोप बेबुनियाद हैं। वहीं खरीद अधिकारी और डिप्टी आरएमओ विकास चंद्र तिवारी ने बृहस्पतिवार को मंडी परिसर पहुंचकर क्रय केंद्रों पर खरीद का जायजा लिया।
-
निकाल रहे हैं कमियां...कैसे बिकें धान
सौ क्विंटल धान लेकर आए थे। अच्छा धान था, 1650 रुपये के हिसाब से बिका। सरकारी केंद्रों पर सैकड़ों कमियां निकाल देते हैं। इसलिए केंद्र पर धान नहीं डाला।
- सुखदेव सिंह, अमरिया
---
पहले कम तो फिर ज्यादा बारिश ने मारा। ज्यादा बारिश से धान की क्वालिटी पर भी असर पड़ा है। किसानों के पास इतना वक्त नहीं है कि धान सुुखाकर, साफ करके क्रय केंद्र पर लाए। इसलिए मैने अपना 150 क्विंटल धान प्राइवेट में बेचा।
- मोहम्मद सिराज, निवार्ड फार्म अमरिया
---
आठ बीघा धान था। 20 क्विंटल निकले। बारिश में धान खराब हो गया। मंडी में 1200 रुपये में लिया गया। इतने में तो लागत भी नहीं निकली।
- पूरन सिंह, भिखारीपुर
---
क्रय केंद्र पर जाएं तो वहां मानकों को बहाना बना दिया जाता है। बारिश से धान बदरंग हुआ है। क्रय केंद्र पर खरीदा नहीं जाएगा तो मजबूरन प्राइवेट में बेचना पड़ रहा है।
-कश्मीर सिंह, अमरिया
---------
मानकों के अनुसार क्रय केंद्रों पर खरीद हो रही है। ज्यादा खराब या डैमेज धान नहीं खरीदा जा सकता। फिर भी कोशिश कर रहे हैं कि किसानों को परेशानी न हो। पांच फीसदी तक डैमेज धान खरीदा जा रहा है।
- विकास चंद्र तिवारी, डिप्टी आरएमओ