रोडवेज बस का खस्ताहाल गेट । संवाद
पीलीभीत। परिवहन निगम की अधिकतर बसें खस्ताहाल हो चुकी हैं। इनमें मानकों के अनुरूप सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में इन बसों के संचालन से हादसे की आशंका बनी रहती है। बावजूद इसके जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते।
परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाए जाने के लिए लगातार दावे किए जाते हैं। नई बसों के साथ ही यात्रियों को बेहतर सफर कराने का दावा किया जाता है जो पूरा होता नहीं दिखता।
स्थानीय डिपो से कुल 107 बसों का संचालन किया जाता है। इसमें से नौ बसें अनुबंध पर संचालित की जाती हैं। परिवहन निगम यात्रियों से सुविधाओं के नाम पर किराया तो हर मद में वसूलता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। इसी का नतीजा है कि बसों में तारों का मकड़जाल फैला रहता है, इसके अलावा खिड़कियां जाम तो सीटें भी यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनती हैं। ऐसे में इन बसों की मरम्मत कराकर काम चलाया जाता है। ऐसे में हादसे की आशंका भी बनी रहती है।
इस संबंध में जब पड़ताल की गई तो कई बसों के गेट तक खस्ताहाल निकले। इनमें न तो लॉक था और न हीं वे बंद हो सकते थे। इसके अलावा अधिकतर बसों में लगे फायर सिलिंडर भी पूरी तरह से निष्प्रयोज्य थे। कुछ तो एक्सपायर होने के बाद भी लगे थे।
इसके संबंध में एआरएम पवन कुमार श्रीवास्तव का कहना था कि किसी भी तरह की दिक्कत वाली बस का संचालन सड़क पर नहीं किया जाता है। वर्कशॉप में काम कराने के बाद ही उन्हें मार्ग पर भेजा जाता है। जिन बसों में दिक्कत है, उन्हें दिखवाकर सही कराया जाएगा।
रोडवेज बस का खस्ताहाल गेट । संवाद
रोडवेज बस का खस्ताहाल गेट । संवाद