उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की कोशिश सफल होती नहीं दिख रही है। इसकी एक वजह संसाधनों का अभाव है। जिले के रामलुभाई साहनी राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मात्र चार प्रवक्ता हैं। जब कि यहां बीए को छोड़कर बीएससी, बीकॉम व एमकॉम की कक्षाएं चलती हैं। यहां बीएससी (जेडबीसी व पीसीएम) की 80-80, बीकॉम की 80 व एमकॉम की 60 सीटें हैं। महाविद्यालय की स्थापना 1997 में हुई थी। शुरू के दिनों में यहां दाखिले के लिए खूब मारा मारी होती थी लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। महिला महाविद्यालय में प्राचार्य समेत कॉमर्स के दो प्रवक्ता पदों के सापेक्ष एक, ज्योलॉजी, बॉटनी, मैथ के एक-एक पद के सापेक्ष एक-एक प्रवक्ता तैनात हैं, लेकिन फिजिक्स व केमिस्ट्री प्रवक्ता का पद रिक्त है। यहां प्राचार्य रहे डॉ. आरसी वाजपेई का स्थानांतरण हरदोई हो चुका है। उनके स्थान पर प्रवक्ता डॉ. नरेशपाल प्रभारी प्राचार्य बतौर कार्य देख रहे हैं। खास बात यह है कि शासन द्वारा डॉ. नरेशपाल की भी पदोन्नति कर उन्हें प्राचार्य बनाया गया है। ऐसे में उनका भी यहां से जाना तय है। इसके बाद यहां डॉ. दिनेश चंद्रा, डॉ. नगेंद्रपाल व डॉ. नरेंद्र बत्रा के कंधों पर ही सारी जिम्मेदारी रहेगी।