बीसलपुर। उत्पीड़न से परेशान होकर परिवार के साथ कमरे में बंद गन्ना विभाग का कर्मचारी छठे दिन घर पहुंचे गन्ना अधिकारी (डीसीओ) के आश्वासन देने पर बाहर निकला। इससे पुलिस ने काफी राहत महसूस की है।
मोहल्ला ग्यासपुर निवासी सहकारी गन्ना विकास समिति के कर्मचारी अजीत सिंह ने अधिकारियोंं पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए 13 सितंबर को मय परिवार खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया था। बताया जा रहा है कि उसने कमरे में लकड़ी की चिता भी बना ली थी और पेट्रोल भी रख लिया था।
अजीत का कहना था कि वर्ष 1999 में समिति में उनके पिता सरनाम सिंह की तैनाती के दौरान 10 लाख का घोटाला हुआ था। उस घोटाले के आरोप में उनके पिता के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पिता की जेल में मौत भी हो गई थी। बावजूद इसके विभाग उस घोटाले की राशि अजीत सिंंह से वसूल करना चाहता है।
अजीत सिंह ने फोन पर जिला गन्नाधिकारी को बता दिया था कि यदि उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इसी कमरे में सपरिवार चिता पर बैठकर आत्मदाह कर लेगा। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से उसके घर के दरवाजे पर पुलिस तैनात कर दी थी। बुधवार को डीसीओ डॉ. खुशीराम भार्गव ने अजीत सिंह के घर पहुंचकर उनकी समस्या सुनी और यथा संभव मदद करने का आश्वासन दिया।
डीसीओ के आश्वासन पर अजीत बंद कमरे से सपरिवार बाहर आ गया। डीसीओ के साथ सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव राजेश कुमार भी थे। अजीत सिंह ने बताया कि डीसीओ ने उनके मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। इसलिए उन्होंने सामूहिक आत्मदाह का निर्णय वापस ले लिया है। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। प्रशासन ने अजीत के दरवाजे से पुलिस भी हटा ली है।