पीलीभीत। घायल होने के बाद रेस्क्यू कर लखनऊ चिड़ियाघर भेजे गए जख्मी बाघ की अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वापसी की आस खत्म हो गई है। आईवीआरआई के विशेषज्ञों की जांच में बाघ अस्वस्थ पाया गया। पैर में सूजन भी पाई गई।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में पर्यटन के चिह्नित मार्गों पर दो माह पूर्व एक बाघ की वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें बाघ के लंगड़ाकर चलने की बात सामने आई थी। मामले में डीएफओ मनीष सिंह ने गंभीरता दिखाई। सच्चाई जानने को पहले निगरानी कराईं। कैमरों से भी मदद ली गई। इसके बाद स्थिति से अवगत कराकर बाघ को रेस्क्यू करने के लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी गई।
21 अप्रैल को महोफ रेंज के जंगल से सटे इलाके में बाघ की मौजूदगी देखे जाने के बाद विभाग की ओर से रेस्क्यू शुरू किया गया। कुछ घंटों की मशक्कत के बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद मुख्यालय के निर्देश पर लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया।
कुछ समय बाद जख्म में सुधार होने की जानकारी पर अफसर बाघ के दोबारा पीटीआर लाने की संभावना जता रहे थे, लेकिन कुछ दिन पूर्व आईवीआरआई बरेली के सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. एएम पावड़े ने लखनऊ चिड़ियाघर पहुंचकर पीटीआर के बाघ की हकीकत परखने के लिए परीक्षण किया और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी।
जिसमें बाघ के जंगल में रहने के योग्य नहीं बताया गया। अगले पैर में सूजन भी पाई गई। जिसके चलते बाघ के पीटीआर वापसी की उम्मीदें समाप्त हो गई। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि बाघ को रेस्क्यू कर पीटीआर से लखनऊ चिड़ियाघर में भेज दिया गया था। विशेषज्ञों ने परीक्षण किया था। जिसमें बाघ जंगल में रहने के योग्य नहीं पाया गया। ऐसे में अब बाघ के वापसी की संभावना समाप्त हो गई है।