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Pilibhit News: चाहे जितने हो बीमार... सिर्फ एक मिनट ही दे सकेंगे डॉक्टर

Tue, 05 Sep 2023 11:43 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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जिला चिकित्सालय का फाइल फोटो ।
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पीलीभीत। डॉक्टरों के अभाव में मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) अव्यवस्थाओं का गढ़ बनकर रह गया है। रोजाना ओपीडी में 1500 से 1800 मरीज पहुंच रहे हैं। स्टाफ न होने से मरीजों को सही से उपचार भी नहीं मिल पा रहा है। हाल यह है कि डॉक्टर मरीज को एक मिनट तक का वक्त नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि मरीजों का क्या इलाज हो रहा होगा।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर बताते हैं कि वह रोजाना सुबह साढ़े नौ बजे अस्पताल आ जाते हैं और दोपहर दो बजे तक करीब 300 मरीज देखते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो डॉ. सागर 270 मिनट में 300 मरीजों को देखते हैं। मतलब एक मिनट भी मरीज के हिस्से में नहीं आता है। इस दौरान उन्हें मरीज के नाम से लेकर बीमारी तक पूछनी होती है और फिर पर्चे पर दवा भी लिखनी होती है। खुद डॉ. सागर इस बात को स्वीकार करते हैं कि इतने कम समय में रोग का निदान करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि मरीजों की अधिकता को देखते हुए अब खड़े-खड़े ही मरीजों से हालचाल पूछा जाता है।

मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 13 से 15 सौ मरीजों के पर्चे बन रहे हैं। इसके अलावा दो-तीन सौ मरीज पुराने आते है। करीब 1500 से 1800 मरीज रोजाना ओपीडी में आ रहे हैं। हाल यह है कि इनके उपचार के लिए महज नौ डॉक्टर व 14 जूनियर डॉक्टर है। नौ में से इमरजेंसी के लिए तीन डॉक्टर निकल जाते हैं। इसके अलावा एक सर्जन ऑपरेशन थियेटर में रहते हैं। इसके अलावा एक बेहोशी के डॉक्टर है।
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मरीजों को देखने के लिए सिर्फ चार डॉक्टर ही बचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा भीड़ फिजिशियन के कक्ष में ही रहती है। हाल यह है कि डॉक्टर व स्टाफ की कमी के कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। इसके अलावा मरीजों को डॉक्टर को दिखाने व दवा के लिए कई घंटों लाइन में लगना होता है। जिससे कई बार तो झगड़े की नौबत तक आ जाती है।


एक माह में 12 जूनियर डॉक्टर छोड़ गए नौकरी
स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए अभी हाल ही में मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग कराई गई थी। काउंसलिंग के बाद 26 जूनियर डॉक्टर ने ज्वाइन किया था। एक महीने में ही इनमें से 12 जूनियर डॉक्टर नौकरी छोड़कर चले गए। 14 में से भी 10-12 ही आ रहे हैं। अब दोबारा कांउसिलिंग करके जूनियर डॉक्टरों को रखने की प्रक्रिया चल रही है।

महज चार डॉक्टर निपटा रहे ओपीडी
जिला अस्पताल में महज चार सीनियर डॉक्टर ओपीडी निपटा रहे हैं। इसमें फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर, ईएनटी डॉ. प्रवीण शर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरभि के अलावा खुद प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजीव सक्सेना है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सक्सेना ओपीडी के बजाय अपने कक्ष में ही मरीजोंं को बुलाकर देखते हैं। उन्होंने बताया कि नीचे कक्ष में बैठना संभव नहीं। चूंकि प्रशासकीय कार्य भी करने होते हैं। इसलिए दोनों काम साथ-साथ चलते रहते हैं।

कक्ष संख्या तीन में बैठाए जूनियर डॉक्टर
मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण जिला अस्पताल के कक्ष संख्या तीन में जूनियर डॉक्टरों को बैठाया गया है, लेकिन अधिकांश लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है। तीन-तीन सौ मरीजों के हिसाब से करीब 1200 मरीजों को विशेषज्ञ देख लेेते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में भी कई मरीज पहुंच जाते हैं। कई लोग जांचें दिखाने आते हैं। उन्हें दो बजे तक रुकना होता है। डॉक्टर ओपीडी निपटाने के बाद ही जांच रिपोर्ट देखते हैं।

वर्जन:

26 जूनियर डॉक्टरों ने यहां आकर ज्वाइन किया था। दूसरी जगह चयन हो जाने के कारण 12 जूनियर डॉक्टर चले गए है। 14 अभी अस्पताल में कार्य कर रहे हैं। स्टाफ की मांग के लिए पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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