पीलीभीत। एआरटीओ कार्यालय में ऑनलाइन प्रक्रिया और पारदर्शिता का दावा बेमानी है। यहां आवेदक कम, बाहरी लोग अधिक घूमते रहते हैं। दो हजार रुपये देने पर टेस्ट पास कराने और लाइसेंस बनवाने की गारंटी ली जाती है। यह भी कहा जाता है कि खुद टेस्ट देकर फेल हो सकते हो, मगर बाहर बैठने वाले लोगों के जरिये बिना टेस्ट कराए ही काम करा दिया जाएगा। बाहरी लोगों की आवाजाही परिसर ही नहीं, कर्मचारियों के पास तक रहती है। खुद से आवेदन करने वाले आवेदक चक्कर काटते हैं।
बृहस्पतिवार की दोपहर 12.15 बजे अमर उजाला की टीम ने एआरटीओ कार्यालय की पड़ताल की तो आवेदक से अधिक बाहरी लोग कार्यालय में चक्कर लगाते दिखे। टनकपुर हाईवे से एआरटीओ कार्यालय तक मार्ग पर दुकान व मिनी कार्यालय खोल रखे हैं। सड़क से अंदर आने-जाने वाले हर व्यक्ति को रोककर उसका काम पूछा जाता है और फिर उसे गुमराह करते हुए कर्मचारियों व अधिकारी से अपनी खास पहचान बताकर लोगों का काम कराया जा रहा था।
एक दुकान पर पहुंचकर टीम ने जब स्थायी लाइसेंस के आवेदन की प्रक्रिया पूछी तो संचालक ने दो हजार रुपये में पूरा काम कराने व टेस्ट में पास कराने की जिम्मेदारी लेते हुए मामले को ओके कह दिया, जबकि फीस एक हजार ही ली जाती है। इसके बाद जब कार्यालय जाकर देखा, तो हेल्प डेस्क का कर्मचारी अपने पटल से नदारद मिला। साथ ही अन्य पटल के बाबुओं के पास कुछ एक परिचित व बाहर संचालित होने वाली दुकानों के कर्मचारी दिखाई दिए। हर आवेदक के साथ कोई न कोई बगल में फाइल दबाए कार्यालय में आता हुआ दिखाई दिया।
सीसीटीवी बने सिर्फ दिखावा
कर्मचारियों की कार्यप्रणाली सुधारने और आवाजाही की निगरानी को कार्यालय पसिर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इससे किसी आवेदक के काम के दौरान किसी तरह की कोई परेशानी न हो। मगर सीसीटीवी कैमरों का मजाक बनाते हुए कार्यालय में काम किया जा रहा है। दिन में कई बार कार्यालय के चक्कर काटने वाले लोगों पर इन कैमरों का कोई असर नहीं। अगर सीसीटीवी की फुटेज जांची जाए तो आवेदक से ज्यादा बाहरी लोग नजर आएंगे।
बाबू जी, मेरी फाइल देख लो
दोपहर 12.20 बजे ट्रांसफर व अन्य पटल पर कई लोग जमा थे। इसमें कुछ वह चेहरे भी थे, जो आवेदक को बाहर रोककर काम की गारंटी लेते हैं। हाथ में लिए कागज पर कई फाइलों के नंबर लिखे युवक ने कर्मचारी से कहा कि मेरी फाइल देख लो। कुछ देर बाद वह कार्यालय के अंदर कर्मचारी के पास चला गया। दूसरे पटल पर भी कई लोग खड़े थे। अंदर जाकर भी काम कराया जा रहा था।
वर्जन
बाहरी लोगों के साथ आवेदक आने पर किसी का काम नहीं होने दिया जा रहा है। आवेदक के आने पर ही काम को किया जा रहा है। कार्यालय में लगे सीसीटीवी के आधार पर ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। - वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में वायो मैट्रिक कक्ष के बाहर लगी भीड़ । संवाद
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में वायो मैट्रिक कक्ष के बाहर लगी भीड़ । संवाद