जंगल सीमा पर की गई जाल फेंसिंग । संवाद
कलीनगर। माला रेंज से सटे संवेदनशील इलाके के पांच किलोमीटर दायरे में जाल फेंसिंग का कार्य पूरा हो गया है। अभी तीन किलोमीटर का कार्य होना शेष है। सीमा की घेराबंदी होने से बाघ समेत वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने पर रोक लगेगी। हमले भी रुकेंगे।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला के जंगल से सटे मथना जपती, पुरैनी दीपनगर, रानीगंज और बांसखेड़ा क्षेत्र में पिछले एक साल से बाघों की अधिक सक्रियता देखी जा रही थी। मानव-वन्यजीव संघर्ष की भी कई घटनाएं सामने आईं । करीब चार लोगों की बाघ के हमलों में मौत भी हुई। ग्रामीणों के रोष के बाद टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जाल फेंसिंग को लेकर शासन स्तर पर पैरवी की।
शासन ने सात करोड़ रुपये का बजट जारी किया । इससे माला रेंज से सटे मथना जपती क्षेत्र के संवेदनशील इलाके में करीब पांच किलोमीटर दायरे में जाल फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है। अभी तीन किलोमीटर का कार्य होना शेष है। यह इलाका मानव वन्यजीव संघर्ष के मामले में संवेदनशील माना जाता है।
रेंजर आरके सिंह का कहना है कि जाल फेंसिंग का कार्य जारी है। शेष बचे क्षेत्र में भी जल्द कार्य कराया जाएगा।
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मथना वन चौकी को भी मिला सुरक्षा कवच
मथना जपती वन चौकी के निकट भी अक्सर हिंसक वन्यजीवों की चहलकदमी देखी जाती थी। इससे खतरा बना रहता था। बैरियर पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारी शाम होते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने चौकी को सुरक्षित करने के लिए भी तीनों सीमाओं पर जाल फेंसिंग करा दी है। इससे यहां अब वन्यजीवों का खतरा कम हो गया है।