शहर के एक होटल में आयोजित कार्यशाला में किसानों को अपनी फसल का सही दाम पाने के लिए स्वयं के उत्पादक संघ एवं उत्पादक कंपनी बनाने की जानकारी दी गई। जीएम नाबार्ड ने कहा खेती करने वाले किसानों में लघु व सीमांत कृषकों की संख्या अधिक है। इसके चलते वह अपनी फसल को सही बाजार में नहीं बेच पाते। परिणाम स्वरूप बिचौलिया लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपना उत्पादक संघ या कंपनी बनाकर फसलों की ग्रेडिग, पैकिंग आदि कर अच्छा लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए किसान व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से अथवा एनजीओ, समितियां आदि भी उत्पादक संघ का गठन कर सकती हैं। उत्पादक संघ के माध्यम से कृषि से जुड़े पशुपालन, पुष्प एवं फलोत्पादन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, सब्जी उत्पादन, हरकरघा, हैंडलूम आदि का कार्य किया जा सकता है। उन्होंने संघ गठित करने की पूरी प्रक्रिया भी समझाई। डीडीएम नाबार्ड एके रावत ने बताया प्रदेश को दो वर्षों में 50 संघ बनाने का लक्ष्य दिया गया है। कार्यशाला में जिला सहकारी बैंक के अनुराग अवस्थी, उपनिदेशक कृषि एके सिंह, कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका, एलडीएम केडी नौटियाल, डिप्टी सीवीओ, पहल ग्रामीण सेवा समिति के महेश पाल, हरीशंकर सहित कई अधिकारी कर्मचारी एवं प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।