रोडवेज बस स्टैंड पर खड़ी बसे । फाइल फोटो
पीलीभीत। यात्रियों को बस में टिकट लेने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए परिचालकों को पॉश मशीनें दी गईं हैं। इसमें क्यूआर कोड से भुगतान लेकर टिकट देने की व्यवस्था है, बावजूद इसके अधिकांश परिचालक इस सुविधा का लाभ यात्रियों को नहीं दे रहे। डिजिटलाइजेशन व्यवस्था होने के बावजूद ऐसा न किए जाने से यात्री परेशान हैं।
कई बार यात्रियों के पास छुट्टे पैसे न होने पर परिचालक ज्यादा धनराशि रख लेते हैं। बची हुई धनराशि टिकट के पीछे लिख दी जाती है। कई बार यात्री जल्दबाजी में अपने बकाया रुपये लेना ही भूल जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए परिवहन निगम ने परिचालकों को पॉश मशीनें दी हुई हैं। इसमें क्यूआर कोड के जरिए सीधे यात्री के खाते से किराए के रुपये कटकर परिवहन निगम के खाते में जमा हो जाते हैं। नकद लेन-देन का कोई मतलब नहीं रह जाता। शासन स्तर से परिचालकों को यात्रियों को क्यूआर कोड के माध्यम से टिकट देने को कहा गया है। बावजूद इसके पीलीभीत डिपो की बसों में यात्रियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
क्यूआर कोड न मिलने से यात्री से मांगने पड़ रहे रुपये
पीलीभीत डिपो की एक बस सुबह नौ बजे बीसलपुर के बारह पत्थर चौराहे पर पहुंची। बस चलने लगी इतने में एक युवक दौड़ता हुआ बस पर सवार हुआ। इसके बाद परिचालक ने टिकट बनाना शुरु किया। युवक के पास नकद रुपये नहीं थे। जब उसने क्यूआर कोड मांगा तो परिचालक ने मना कर दिया। क्यूआर कोड के माध्यम से रुपये लेकर एक अधिवक्ता ने युवक को सौ रुपये नकद दिए। तब युवक टिकट ले सका।
सभी परिचालकों को क्यूआर कोड दिया गया है। इससे यात्री ऑनलाइन भुगतान कर टिकट प्राप्त कर सकते हैं। अगर किसी परिचालक द्वारा क्यूआर कोड से पैसे लेने से इन्कार किया गया है तो कार्रवाई की जाएगी। यहां बहुत संभव है कि परिचालक को क्यूआर कोड से पैसे लेकर टिकट देने का तरीका न आता हो या उस वक्त पॉस मशीन में नेटवर्क न हो। अगर ऐसा है तो उसे प्रशिक्षण दिया जाएगा। मशीन की चेक कराई जाएगी। - पवन कुमार श्रीवास्तव, एआरएम