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Pilibhit News: तीन करोड़ से ज्यादा ऋण, वसूली केवल 15 हजार

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उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम नहीं ली सुध
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संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम की ओर से जब टर्मलोन मनी ब्याज रहित ऋण योजना लागू की गई तब लोगों ने खूब ऋण लिया, पर वे इसे लौटा नहीं पाए। लंबे समय तक विभाग भी इसे भूले रहा। मार्च में वित्तीय हिसाब का समय आया तब याद आई। जमकर प्रयास हुए तब जाकर तीन करोड़ के सापेक्ष महज 15 हजार रुपये की वसूली हो पाई। खास बात यह है कि जिन 982 लोगों को ऋण बांटे गए हैं उनमें कई का तो अता-पता ही नहीं मिला।
1995 से 2009 तक उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम की ओर से टर्म लोन मनी ब्याज रहित ऋण योजना लागू की गई थी। मकसद यह था कि लोग अपना कारोबार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकें। इस योजना के तहत 982 लाभार्थियों ने ऋण लिया। किसी ने दस हजार तो किसी ने पचास हजार तक का ऋण लिया।
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बाद में अधिकतर लाभार्थियों ने ऋण लेने के बाद उसे चुकता करने के संंबंध में कोई ध्यान नहीं दिया। ब्याज लगाकर धीरे धीरे रकम मूलधन से ज्यादा हो गई। विभाग भी लंबे समय तक इनसे वसूली करना भूले रहा। कई साल बाद अधिकारियों ने बांटे गए ऋण की सूची निकलवाई तो आंकड़े चौंकाने वाले थे। करीब 3 करोड़ 44 लाख रुपये से अधिक की बकायेदारी निकली।
मार्च माह में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी केपी सिंह ने बकायेदारों से वसूली के लिए टीमें गठित कीं। विशेष अभियान चलाया। नतीजा यह निकला कि महज 15 हजार रुपये की वसूली हो सकी। अधिकांश ऋण लेेने वालों का तो कोई पता ही नहीं चल सका।
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न अधिकारी, न स्टाफ, कैसे हो वसूली
जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की बात करें तो इसकी बेहद दयनीय स्थिति है। यहां न तो अधिकारी है न ही स्टाफ। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी केपी सिंह के पास अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का अतिरिक्त चार्ज है। इसके अलावा दिव्यांग पेशन का काम भी वहीं देख रहे हैं। केपी सिंह ने बताया कि पिछले तीन साल से यहां कोई अधिकारी नहीं आया। स्टाफ भी नहीं है। महज संविदा पर दो कर्मचारी हैं। वसूली के लिए एक फील्ड ऑफिसर तक नहीं है। उन्होंने बताया कि विभाग के पास तो बकायेदारों का आंकड़ा तक नहीं था। उन्होंने किसी तरह से लखनऊ से आंकड़ा मंगवाया, उसे भी अभी छंटवाया जा रहा है।
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करीब तीन करोड़ से ज्यादा का बकाया है। लखनऊ से लिस्ट मंगवाकर इस बार वसूली के प्रयास शुरू किए हैं। 15 हजार रुपये मार्च माह में वसूली हुई है और प्रयास जारी हैं।
- केपी सिंह, कार्यवाहक जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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