1700 छुट्टा पशुओं में 200 गोशाला में भेजे, 250 छोड़ सब समा गए गोशालाओं में
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। एक माह पहले शासन ने 31 मार्च तक सभी छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में भेजने के निर्देश दिए थे। तब जिले में घूम रहे छुट्टा पशुओं की संख्या करीब 17 सौ के आसपास थी। इसके बाद जिले में चार गोशालाएं बनीं। इसमें 50-50 के हिसाब से करीब 200 छुट्टा पशु संरक्षित करने का दावा किया गया। इसके बाद भी करीब 1500 छुट्टा पशु सड़क पर घूम रहे थे। इनके लिए न कोई गोशाला बनी न कोई इंतजाम हुआ। अब जब मार्च समाप्ति को महज एक दिन शेष है तो कागजों में छुट्टा पशुओं की संख्या महज 250 रह गई है। कागजों की गोशाला में आंकड़ेबाजी की रस्सी से इन छुट्टा पशुओं को बांध दिया गया है।
शहर से लेकर गांव और सड़कों पर छुट्टा पशुओं को देखा जा रहा है। यह पशु लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। शासन ने छुट्टा पशुओं को 31 मार्च तक संरक्षित करने के आदेश जारी किए थे। कहा गया था पशुओं को संरक्षित कर रिपोर्ट दी जाए। यही नहीं नई गोशालाओं का निर्माण तेजी के साथ करवाया जाए। शासन से आदेश मिलने के बाद विभाग के जिम्मेदारों ने गोशालाओं के निर्माण में तो तेजी नहीं दिखाई, अलबत्ता पशुओं की संख्या कम करने का खेल जरूर शुरू कर दिया।
जिले में घूम रहे करीब 17 सौ छुट्टा पशुओं का आंकड़ा एक माह में ऐसा कम किया कि कागजों में इनकी संख्या मात्र 250 रह गई। वहीं सड़कों पर अब भी छुट्टा पशुओं की संख्या में कोई कमी नहीं दिख रही।
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12 गोशालाओं में से हो सका चार का निर्माण
छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए जिले में 12 नई गोशालाओं का निर्माण होना था। अधिकारियों की ओर से खास रुचि न लेने के कारण निर्माण अब तक महज चार का ही काम पूरा हो सका। इसमें मरौरी क्षेत्र में दो नई गोशालाएं बनीं और इसमें 50-50 पशुओं को रखा गया। बरखेड़ा और बिलसंडा क्षेत्र में भी एक-एक गोशाला पूरी हो सकी। यहां पर भी 50- 50 पशु संरक्षित कर दिए गए।
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जिले में संचालित हो रही हैं 47 गोशालाएं
जिले में पशुओं को संरक्षित करने के लिए मनरेगा के तहत 34, शासन द्वारा वित्त पोषित तीन, स्थायी/अस्थायी गो संरक्षण केन्द्र तीन, कान्हा गोशाला तीन, सांसद निधि से एक गोशाला जो देवीपुरा में स्थित है। विधायक निधि से तीन गोशालाएं दियोरिया, मरौरीखास और राजपुर कुंडरी में संचालित हैं।
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2824 पशुुओं की क्षमता, साढ़े चार हजार से ज्यादा ठूंस दिए पशु
आंकड़ों का संदर्भ लें तो जिले में 47 गोशालाओं का संचालन हो रहा है। इनकी क्षमता 2824 पशुओं की है। इनमें सबसे बड़ी गोशाला देवीपुरा की है। इसमें 350 पशुओं को रखने क्षमता है, जबकि यहां एक हजार से भी ज्यादा पशु हैं। कुल मिलाकर सरकारी आंकड़ों में इन 47 गोशालाओं में 2824 पशुओं के सापेक्ष 3459 पशु हैं। यह स्थिति एक माह पहले की है। अधिकारियों का कहना है कि करीब 12 सौ छुट्टा पशुओं को भी इन गोशालाओं में भेजा गया है। मतलब 47 गोशालाओं में साढ़े चार हजार से ज्यादा छुट्टा पशु हैं। ऐसे में पशुओं की क्या हालत होगी खुद ही समझा जा सकता है।
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शासन के आदेश पर छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में भेजा जा रहा है। मौजूदा समय में मात्र 245 पशु ही शेष बचे हें। इनको भी गोशाला भेजा जा रहा है। चार नई गोशालाओं का निर्माण हो चुका है।
- डॉ. आरविंद, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी