पीलीभीत। सरकारी स्कूलों का नाम आते ही स्कूलों की बदहाल सी तस्वीर सामने आ जाती है लेकिन शहर से सटे बरहा गांव का कंपोजिट स्कूल अन्य सरकारी स्कूलों के लिए मिसाल बना हुआ है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कई मामलों में स्कूल अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का मुकाबला कर रहा है। यह सब योजनाओं के सफल क्रियान्वयन और अध्यापकों के सामूहिक प्रयासों से संभव हुआ है।
बरहा गांव के कंपोजिट स्कूल में 808 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। करीब 15 शिक्षकों पर स्कूल की जिम्मेदारी है। स्कूल की व्यवस्था और बेहतर शिक्षण कार्य के चलते पूर्व में प्रधानाध्यापक से लेकर कई शिक्षकों को प्रदेश स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इस बार एक नई पहल को और मिसाल में बदल दिया। जब परिसर क्षेत्र में खंडहर पड़े शौचालय को हटवाकर बड़े हॉल का निर्माण करा दिया। प्रधानाध्यापिका ममता गंगवार समेत शिक्षकों ने सामूहिक प्रयास कर इस हॉल में मॉडल लाइब्रेरी में विकसित कर दी। अंग्रेजी माध्यम स्कूल की तर्ज पर लाइब्रेरी को सजाया दिया। बच्चे नियमित रूप से अपने समय को लाइब्रेरी में बिताकर ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।
विभिन्न किताबों का है लाइब्रेरी में संग्रह
लाइब्रेरी में विद्यार्थियों के बैठने के लिए अच्छी क्वालिटी की बेंच डाली गई हैं। कक्षा में खाली टाइम में बच्चे वहां जाकर कंप्टीशन समेत विभिन्न प्रकार की किताबों को पढ़ते हैं। कबीर फाउंडेशन की ओर से भी विभिन्न प्रकार की दो सौ किताबें लाइब्रेरी में उपलब्ध कराई गई हैं।
छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराए जाते हैं लाइब्रेरी कार्ड
लाइब्रेरी की व्यवस्थाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों को किताबों को उपलब्ध कराने के लिए लाइब्रेरी कार्ड भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा कौन सी किताब कहां रखी है इसके लिए भी अलग-अलग सूचकांक लगाए हैं। बच्चे भी रुचि के साथ किताबों को पढ़ रहे हैं। किताबों के अलावा लाइब्रेरी में कंप्यूटर बेंच भी बनवाई गई है। स्टाफ के मुताबिक कम्प्यूटर की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
इन शिक्षकों का रहा सहयोग
मॉडल लाइब्रेरी को स्थापित करने के लिए तत्कालीन एआरटीओ अमिताभ राय के अलावा स्कूल की प्रधानाध्यापिका ममता गंगवार, संतोष खरे, विजेता, मीना, शैलेंद्र जायसवाल, रमेश चंद्रा, पवन जायसवाल, गीता कुमारी, करुणा गौड़, निधि अग्रवाल, गुंजन चावला, सृष्टि कटियार और विजय लक्ष्मी का सहयोग रहा।