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Pilibhit News: गुड्डे-गुड़ियों की तरह हो रहीं सरकारी शादियां, ठाठ-बाट अफसरों के

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सामूहिक विवाह समारोह में बना हवन कुंड। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। बचपन में आपने गुड्डे-गुड़ियों की शादी करवाई होगी। छोटा सा हवनकुंड, गुड़िया को चुनरी उड़ाकर दुल्हन की तरह सजाना, गुड्डे के सिर पर छोटी सी पगड़ी पहनाकर दूल्हा बनाना। इस शादी में गुड्डे-गुड़िया तो महज खिलौना होते थे, मजा तो शादी कराने वाले बच्चे लूटते थे। शुक्रवार को ड्रमंड इंटर कॉलेज में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जोड़े तो महज गुड्डे-गुड़िया की भूमिका भर अदा कर रहे थे। शादी का असली आनंद तो अफसर उठा रहे थे।
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शुक्रवार को ड्रमंड इंटर कॉलेज में सामूहिक विवाह का आयोजन हुआ। यहां पंडाल इतना छोटा था कि जोड़ों के परिवार वाले भी ठीक से नहीं बैठ पा रहे थे, जबकि नियमानुसार वर-वधू के साथ उनके माता-पिता के बैठने की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए थी। ऐसे में 151 जोड़ों के मुताबिक करीब 902 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जानी चाहिए थी, इसके विपरीत यहां पंडाल इतना छोटा बनाया गया था कि 151 जोड़े ही बमुश्किल बैठ पा रहे थे तो छोटी सी हवन वेदी के चारों ओर बैठे जोड़े गायत्री परिवार की सदस्यों के बताए अनुसार वैवाहिक रीति-रिवाजों को कर रहे थे। यहां जिसको जैसे जितने ले मिले, फेरे लिए। एक दूसरे को जयमाला डालकर एक-दूसरे के होने की परंपरा को पूर्ण किया। इसके बाद शादी की दावत के नाम पर भोजन का एक-एक पैकेट, पानी की बोतल सबको दी गई तो दुल्हन का जोड़ा, एक ट्रॉली बैग और एक बर्तन का सेट देकर वर-वधू को विदा कर दिया गया। करीब पांच घंटे तक चले इस शो में सरकार का लक्ष्य भी पूर्ण हो गया और बजट भी खप गया।
यहां बता दें पिछले 10 दिनों में समाज कल्याण विभाग 391 शादियां करा चुका है। शादियों की इस हवन वेदी में समाज कल्याण विभाग सरकारी इमदाद के 62 लाख रुपये स्वाहा कर चुका है। (संवाद)
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किसी के सिर पर पगड़ी नहीं तो किसी ने बगैर सुहागिन के जोड़े के लिए फेरे
व्यवस्थाओं का हाल यह रहा कि कई जोड़ों के सिर पर पगड़ी नहीं थी, कई दुल्हन ने बगैर सुहागिन के जोड़ों के ही सात फेरे लिए। ऐसे में दूल्हा-दुल्हन के परिजन बार-बार मांग करते रहे तो मंच से यही एनाउंस कराया जाता रहा कि पगड़ी आ रही है लेकिन आखिर तक पगड़ी नहीं आ सकी। बगैर पगड़ी और सुहागिन के जोड़े के ही सरकारी शादियां निपटा दी गईं।
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हवन वेदी इतनी छोटी की लकड़ी भी न समाए
एक जोड़े को छोड़कर 150 जोड़ों की हिंदू रीतिरिवाज से शादी हुई। शादी के लिए मैदान में हवन कुंड बनाए गए लेकिन ऐसे कि देखकर हैरत होने लगे। एक ईंट के लंबाई-चौड़ाई भर जगह में हवन कुंड बना दिए गए। इसमें लकड़ी के चार टुकड़े तक एक साथ नहीं आ सकते थे। लकड़ी भी नाममात्र की मंगवाई गई।
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एक जोड़े पर 16 हजार रुपये खर्च के लिए देती है सरकार
यूं तो सरकार एक जोड़े को 51 हजार रुपये शादी के लिए देती है। इसमें 35 हजार रुपये दुल्हन के खाते में जमा किए जाते हैं। इसके अलावा 16 हजार रुपये वैवाहिक कार्यक्रम पर खर्च होते हैं। इन 16 हजार रुपयों में 10 हजार रुपये विवाह संस्कार संपादित करने और शेष छह हजार रुपये में बिजली, पानी, टैंट आदि पर खर्च किया जाता है। ड्रमंड इंटर कॉलेज में शुक्रवार को हुई 151 जोड़ों की शादियों पर सरकारी तरीके से 24 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हुए लेकिन व्यवस्थाएं बता रहीं थी कि इसके आधे भी खर्च कर दिए होते तो इससे अच्छी तरह शादियां होतीं।
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कोरोना के समय से एक जोड़े को मिलाकर पांच लोगों के बैठने का नियम बना दिया गया है। पहले जोड़े के साथ दस लोगों के बैठने का नियम था। कुल 391 जोड़ों की शादी की गई है। दस हजार रुपये का सामान प्रत्येक जोड़े को दिया गया है। टैंट, पंडित, खाने पीने आदि पर छह हजार रुपये जोड़े के हिसाब से खर्च किए गए हैं।
- विपिन वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी।

ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में सामूहिक विवाह समारोह में बगैर पगड़ी के बैठा दूल्हा। संवाद- फोटो : PILIBHIT

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