कलीनगर गोशाला में पशुओं की जांच करने पहुची टीम। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। मंडल में कुछ जगह पशुओं में लंपी वायरस के मामले मिलने के बाद जिले में भी बीमारी का खतरा मंडराने लगा है। इसे देखते हुए नेपाल, उत्तराखंड और पड़ोसी जिलों की सीमाओं से जानवरों के आने पर रोक लगा दी गई है। शनिवार को गोशालाओं में जांच के लिए टीमें भी भेजी गईं। हालांकि किसी पशु में संक्रमण नहीं मिला।
देश के कई हिस्सों में लंपी वायरस से हजारों पशुओं की मौत हो चुकी है। प्रदेश के कई जिलों में वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। आसपास के जिलों के पशुओं में भी ये बीमारी मिल चुुकी है। अपने जिले के पशु इस वायरस की चपेट में न आएं, इसके लिए एहतियात बरती जा रही है। नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से आने वाले जानवरों को पर रोक लगा दी गई है। साथ ही पड़ोसी जिलों को लेकर भी ये पाबंदी लागू की गई है। शुक्रवार को हुई बैठक में डीएम ने जिले में पशु मेलों पर रोक लगा दी थी। शनिवार को पशु चिकित्सा विभाग ने टीमें गठित करके जिले की गोशालाओं के पशुओं की जांच कराई। हालांकि किसी पशु में इस बीमारी के लक्षण नहीं मिले।
आवारा पशु बन सकते हैं मुसीबत
जिले में छुट्टा पशुओं की संख्या काफी है। हाईवे पर सैकड़ों छुट्टा पशु घूमते रहते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के लिए ये पशु बड़ी चुनौती हैं। न तो इनकी जांच होती है और न ही इनकी देेखरेख। इस बीमारी को लेकर पशु चिकित्सकों का कहना है कि संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने पर दूसरे पशुओं में ये बीमारी तेजी से फैलती है।
लंपी वायरस को लेकर सभी गोशालाओं में पशुओं की जांच करा रहे हैं। नेपाल और उत्तराखंड की सीमाओं पर अलर्ट रहेगा। वहां से पशु जिले में नहीं आएंगे। -अरविंद गर्ग, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी