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Pilibhit News: स्थानीय मुद्दों को छुआ नहीं, जातीय समीकरण के केंद्र में रहे मुस्लिम मतदाता

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पीलीभीत। बीसलपुर की चुनावी सभा में बसपा सुप्रीमो ने पीलीभीत के स्थानीय मुद्दों का जिक्र तक नहीं किया। उनके संबोधन में बाढ़, छुट्टा पशु, स्वास्थ्य और शिक्षा को जगह नहीं मिली। जिले के जातीय समीकरण के केंद्र में मुस्लिम मतदाता रहे। हिंदुत्व का जिक्र कर मुस्लिमों मतदाताओं को अपने पाले में करने का प्रयास किया गया।
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जिले के जातीय समीकरण में मुस्लिम मतदाता पहले स्थान पर हैं। इनके बाद कुर्मी, लोध, किसान और अन्य आते हैं। बीसलपुर में चीनी मिल के सामने मैदान पर चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने जातीय समीकरण साधने के प्रयास में सर्वसमाज, दलित, गरीब, अल्पसंख्यक का जिक्र किया, लेकिन केंद्र में मुस्लिम मतदाता ही रहे।
उन्होंने मुस्लिमों का जिक्र कई बार किया। बसपा सुप्रीमो ने संबोधन से स्थानीय मुद्दों को किनारे कर दिया। हालांकि सरकार बनने पर जिले की समस्याओं के समाधान की बात जरूर कही। बसपा सुप्रीमो ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म व हिन्दुत्व की आड़ में पिछले कुछ वर्षों से खासकर मुस्लिम समाज के लोगों का द्वेष की भावना से काफी शोषण व उत्पीड़न किया जा रहा है, इसे भी रोका जाएगा।
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उन्होंने, केंद्र सरकार की राशन वितरण योजना का जिक्र किया और आरएसएस का नाम भी अपने संबोधन में लिया। कहा कि इस सरकार में गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिमों एवं अन्य अल्पसंख्यक लोगों का पूर्ण रूप से विकास और उत्थान नहीं हो सका है। (संवाद)

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गन्ना मूल्य से किसानों को खुश करने की कोशिश
बसपा सुप्रीमो ने अपने संबोधन में किसानों का जिक्र किया। कहा कि भाजपा सरकार में शुरू से ही किसान अपनी समस्याओं को लेकर परेशान रहे और अब तक हैं। जबकि यूपी में चार बार रही बसपा सरकार ने किसानों के हितों का पूरा-पूरा ध्यान रखा। गन्ना किसानों को उचित दाम दिया गया। उन्होंने अपने संबोधन में पीलीभीत और शाहजहांपुर के किसानों का जिक्र भी किया।

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जिले की पहचान बाघ और बांसुरी संबोधन से गायब
बसपा सुप्रीमो के संबोधन में जिले की पहचान बांसुरी को भी जगह नहीं मिली तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघ भी स्थान नहीं पा सके। जबकि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जिले में अपनी चुनावी सभा में पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जिक्र किया। यहां के बाघों की अपनी-अपनी तरह से व्याख्या की। जिले की पहचान बांसुरी का भी संबोधन में जिक्र किया गया।
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जिले के पांच स्थानीय मुद्दे
- शारदा नदी की बाढ़
- आवारा पशुओं की समस्या
- परिवहन की बदहाल व्यवस्था
- मानव-वन्य जीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं
- स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार
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जातीय समीकरण
मुस्लिम - 05 लाख से अधिक, कुर्मी - 04 लाख से अधिक, लोध किसान- 04 लाख से ज्यादा
(अनुमानित आंकड़े सोशल साइट से लिए गए हैं।)
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