अमरिया के फुलइैया गांव की जिस 430 एकड़ जमीन को डीएम के फर्जी हस्ताक्षर कर वक्फ बोर्ड प्रबंधक के नाम दर्ज कराया गया है वह 1890 में जमींदार अब्दुल रज्जाक ने वक्फ अलल खैर (दान) की थी। इसके बाद 1950 से इस जमीन पर पाकिस्तान से आए सिख परिवार काबिज है। अमरिया तहसील के गांव फुलइैया निवासी जमींदार अब्दुल रज्जाक के कोई वारिस न होने पर उन्होंने अपनी 430 एकड़ जमीन को वक्फ अलल खैर घोषित कर दिया गया था। इसके बाद यह जमीन लंबे समय तक खाली पड़ी रही। 1950 में भारत पाकिस्तान बंटवारे के बाद आए चार सिख परिवारों को यह जमीन राजस्व की दर्शाकर पट्टे पर दे दी गई तब से यह जमीन सिख परिवारों के कब्जे में और वह इस पर खेती कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बीच वर्ष 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने जमीन वक्फ बोर्ड की होने जानकारी पर इसे वक्फ के नाम दर्ज करने की कवायद शुरू की थी। तब से यह मामला चला आ रहा है। बताते हैं कि वर्ष अक्टूबर 2016 में डीएम मासूम अली सरवर के समक्ष इस बाबत पत्र देकर जमीन वक्फ के नाम दर्ज कराने की शिकायत की गई, जिस पर डीएम ने संबंधित पक्षकार को बुलाकर वार्ता करने को लिखा था लेकिन तब से लेकर उनके जाने से एक दिन पूर्व तक फाइल अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में दबी रही। इसके बाद रहस्यमय ढंग से 19 अप्रैल को यह फाइल कार्यालय से डीएम कार्यालय केे नाम चली गई और 27 अप्रैल को पुन: अल्पसंख्यक कार्यालय लौटी। फाइल में जिस पत्र पर डीएम ने वार्ता को लिखा था उसी पत्र पर जमीन वक्फ बोर्ड के प्रबंधक के नाम दर्ज करने की नोटिंग थी, जिस पर डीएम मासूम अली सरवर के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि फाइल में किसी अन्य अधिकारी की कोई नोटिंग अथवा टिप्पणी भी नहीं बताई जा रही है। इसके बाद चार मई को विभागीय बाबू शाकिर अली इस पत्र को पत्राचार रजिस्टर में 25 नंबर पर अंकित करने स्वयं को वक्फ बोर्ड का प्रबंधक बताने वाले तसलीम हसन को दे दिया। उसी दिन उन्होंने वह आदेश अमरिया के तहसीलदार मोहम्मद असलम को सौंपा और अगले ही दिन रेवन्यू रिकार्ड में जमीन वक्फ बोर्ड के प्रबंधक के नाम दर्ज हो जाती है।