रामलीला मेले में मंगलवार को कुंभकरण और मेघनाद वध लीला का मंचन हुआ। जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया।
लीला का शुभारंभ उस समय होता है, जब भगवान राम और कुं भकरण के बीच युद्ध शुरू होता है। काफी देर तक चले युद्ध के बाद कुंभकरण भगवान राम के हाथों मारा जाता है। कुंभकरण के वध से रावण काफी परेशान हो जाता है और अपने ज्येष्ठ पुत्र मेघनाद को रणभूमि भेजता है। काफी देर तक चले युद्ध में मेघनाद लक्ष्मण के हाथों मारा जाता है। मेघनाद के भी मारे जाने से रावण और अधिक परेशान हो जाता है और अगले दिन की रणनीति बनाने लगता है। आज की लीला का यहीं पर समापन हो जाता है। अंत में मेघनाद का पुतला भी फूं का जाता है। लीला का संचालन मनोज त्रिपाठी, उपेंद्र शंखधार और अवधेश भट्ट ने रामायण की चौपाइया, दोहे पढ़कर किया। मंचन मेला कमेटी के लीला प्रबंधक गोपाल कृष्ण अग्रवाल के निर्देशन में हुआ। मेला कमेटी के जगन्नाथ प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि 12 अक्टूबर को रावण वध लीला का मंचन होगा।