पीलीभीत। इस बार दीपावली पर किसान परेशान हैं। परिवार के बीच खुशियां मनाने के लिए उन्हें आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है। पिछले दिनों हुई बारिश ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। फसल कटाई का खर्च कई गुना बढ़ गया, जैसे-तैसे फसल मंडी लेकर पहुंच रहे हैं तो नमी व मानक का हवाला देकर खरीद नहीं की जा रही।
धान की फसल पककर तैयार हुई तो कटाई से ठीक पहले हुई जबरदस्त बारिश ने इस बार किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। जिले के अधिकांश इलाकों में जलभराव से धान की फसल डूब गई। कई किसानों की तो पूरी की पूरी फसल तबाह हो गई। इधर धान की कटाई की लागत कई गुना बढ़ गई। अब वे जैसे-तैसे फसल कटवाने के बाद बिक्री के लिए मंडी में ले जा रहे हैं तो बाजार में फसल का दाम कम मिल रहा है।
मंडियों का हाल यह है कि खरीद के नाम पर इतनी शर्तें लगा दी जा रही हैं कि वे परेशान होकर रह गए हैं। इधर, किसानों को उम्मीद थी कि गन्ने का बकाया दीपावली से पहले मिल जाएगा तो त्योहार अच्छा हो जाएगा, लेकिन वह भी नहीं मिला। ऐसे में इस बार किसानों की दिवाली फीकी है।
भाकियू (अराजनीतिक) के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह का कहना है कि किसान बहुत परेशान हैं। गन्ने का बकाया भुगतान मय ब्याज के दिलवाने और बारिश में खराब हुई धान की फसल का मुआवजा दिलवाने की मांग को लेकर शासन स्तर पर पत्र भी भेजे हैं। इसके अलावा मांग की गई है कि जो फसल खराब हुई है उसका जल्द मुआवजा दिलवाया जाए। जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सके।
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दुकानदार बोले-इस बार कम बिकी मिठाई
पीलीभीत/बीसलपुर। दुकानदारों का कहना है कि बारिश के कारण फसल खराब हो जाने का असर मिठाई की बिक्री पर भी पड़ा है।
सुनील स्वीट हाउस के प्रोपराइटर शिवराम गुप्ता ने बताया कि पिछले वर्ष धनतेरस, छोटी दीपावली और बड़ी दीपावली पर लगभग 15 क्विंटल मिठाई बिक गई थी। इस वर्ष 10 क्विंटल भी मुश्किल से बिक पाएगी। दीपक स्वीट हाउस के प्रोपराइटर दीपक कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष तीनों दिनों में लगभग 15 क्विंटल मिठाई बिक गई थी। इस वर्ष 12 क्विंटल से अधिक मिठाई नहीं बिक सकी है। इस सभी दुकानदारों ने बताया कि मिठाई कम बिकने का कारण पिछले दिनों हुई भीषण बारिश है।
बीसलपुर मिष्ठान भंडार के मालिक पारस अग्रवाल ने बताया कि वह गिफ्ट पैक नहीं बेचते। मिठाई बेचते हैं। इस बार बरसात के कारण बिक्री कम है। वहीं पवन स्वीट्स के मालिक स्वर्ण कुमार ने कहा कि इस बार बरसात के कारण 20-25 प्रतिशत कारोबार कम रहा। संवाद