मेडिकल कॉलेज स्थित लैंब पर खड़े लोग । फाइल फोटो
पीलीभीत। वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन की मृत्यु के बाद से मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी लैब में टेक्नीशियन का पद रिक्त हो गया है। उपचार कराने आ रहे मरीजों को जांच के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर मरीज बाहर से जांचें कराने के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल के मेडिकल काॅलेज में संबद्ध होते ही उपचार कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब 1000-1500 मरीज यहां उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा पुराने मरीज भी अस्पताल आ रहे हैं।
अधिकतर मरीजों का परीक्षण करने के बाद डॉक्टर जांचें भी लिख रहे हैं। लैब को कई वर्षों से डॉ. रामशंकर गौतम अकेले ही संभाल रहे थे। चार दिन पूर्व स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इससे यह पद रिक्त हो गया।
डॉक्टर, बिना जांच कराए मरीजों को दवा नहीं दे रहे हैं। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए निजी पैथालॉजी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस बारे में मेडिकल कॉलेेज की प्राचार्य संगीता अनेजा ने बताया कि टेक्नीशियन की व्यवस्था कर ली गई। किसी भी मरीज को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
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सक्रिय हुए निजी पैथोलॉजी के दलाल
पैथोलॉजी पर कमीशन के तौर पर काम करने वाले कुछ दलाल अब यहां मेडिकल कॉलेज में सक्रिय हो गए हैं। वह अस्पताल परिसर में ही घूमते रहते है। डॉक्टर के जांच लिखने के बाद मरीजों को अपने वाहन ले जाकर जांचें करा रहे हैं।