कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने अपने दस वर्ष का सफर पूरा कर लिया। इन दस सालों में बाघों की संख्या तीन गुना बढ़ गई। पर्यटन के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए। इससे पीटीआर को विश्व स्तर पर नई पहचान मिली, लेकिन इन दस सालों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं उपलब्धियों पर भारी रहीं। करीब 40 लोगों की जान भी गई।
72 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले जनपद के जंगलों को नौ जून वर्ष 2014 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। इसके बाद जंगल में मानव के दखल को बंद कर बाघ समेत वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर दिया जाने लगा। पांच वन रेंजों में बंटे जंगलों की एक सीमा नेपाल, दूसरी लखीमपुर और तीसरी उत्तराखंड से मिली होने के चलते सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया गया।
सख्ती के बीच शिकार की छुटपुट घटनाएं सामने आती रही, लेकिन बेहतर देखरेख के साथ जंगल के अनुकूल वातावरण के चलते पीटीआर में बाघ समेत वन्यजीवों की संख्या बढ़ी। वर्ष 2014 में 24 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। जो बढ़कर वर्तमान में 71 से अधिक पहुंच गई। अन्य वन्यजीवों की संख्या में भी वृद्धि हुई। (संवाद)
कम पड़ने लगा जंगल का दायरा
वर्ष 2014 से लेकर 2024 तक करीब 40 लोगों की मौत हुई। अधिकतर घटनाएं कलीनगर तहसील क्षेत्र में हुईं। घटनाओं के पीछे बाघों की बढ़ती संख्या के आगे जंगल का सिकुड़ता दायरा अहम वजह मानी गई। घटनाओं को रोकने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की मदद से लोगों को जागरूक करने के साथ जंगल की सीमाओं पर जाल फेंसिंग का कार्य कराने पर जोर दिया गया लेकिन जंगल का दायरा बढ़ाने की ओर अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
बाघों ने दिलाया टाइगर एक्स टू पुरस्कार
बाघों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा होने में पीलीभीत टाइगर रिजर्व आगे रहा। वर्ष 2020 में आई रिपोर्ट में पांच साल में बाघों की दोगुनी संख्या होने पर पीटीआर को विश्व स्तरीय टाइगर एक्स टू पुरस्कार से नवाजा गया। तत्कालीन डीएफओ नवीन खंडेलवाल को सम्मानित किया गया।
पर्यटन ने तोड़े पुराने सभी रिकॉर्ड
पर्यटन के क्षेत्र में भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने नई पहचान बनाई। चूका बीच का नजारा और हरियाली के बीच बाघ समेत वन्यजीवों की मौजूदगी सैलानियों को अधिक पसंद आई। इसके चलते वर्ष 2014 में जहां पर्यटन सत्र के दौरान आने वाले सैलानियों की संख्या 11135 थी, वहीं इस सत्र में अबतक 33 हजार से अधिक पहुंच गई। 150 से अधिक विदेशी सैलानी भी यहां पहुंचे।
अवैध कब्जों पर नहीं दिया गया ध्यान
पीटीआर में बाघों की बढ़ती संख्या के चलते जंगल छोटा पड़ने लगा, लेकिन इसके बावजूद जंगल की हजारों एकड़ जमीन से अवैध कब्जे नहीं हटवाए जा सके।
मानव-वन्यजीवों में हो सामंजस्य स्थापित
पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने अपने 10 वर्ष के कार्यकाल में कई उपलब्धियां हासिल की है, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि मानव और वन्य जीवों के बीच सामंजस्य स्थापित होने से मिलेगी। उम्मीद है हम वन्यजीवों की भावनाओं को समझने पर जोर देंगे, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा और घटनाओं में कमी आएगी।
- शिवम कश्यप, सामाजिक कार्यकर्ता
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों के सुरक्षा कवच को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। आमजन को भी वन्यजीवों के प्रति प्रेम भावना रखने की जरूरत है। इस दिशा में भी जागरूक किया जा रहा है।
- मनीष सिंह, डीएफओ पीटीआर
शिवम कश्यप ।
शिवम कश्यप ।
शिवम कश्यप ।