एचआईवी/एड्स जैसी घातक बीमारी की रोकथाम को बड़े स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं, बावजूद इसके एचआईवी संक्रमितों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। जिले में स्थिति अब और भी बिगड़ सकती हैं, क्योंकि एचआईवी संक्रमितों के लिए काम करने वाले एनजीओ दो साल पहले बंद हो चुके हैं। ऐसे में जिले के एचआईवी संक्रमित सरकारी रडार से दूर होते जा रहे हैं।
एकीकृत परामर्श केंद्र (आईसीटीसी) के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 2003 से लेकर 2015 तक 179 पुरुष और 45 महिलाएं एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। इस साल जनवरी से अब तक तीन पुरुष और भी चिन्हित किए जा चुके हैं। इसके अलावा जिला जेल में 11 बंदी भी एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। जिले में एड्स रोगियों की पहचान को राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा जिला अस्पताल में दो एकीकृत परामर्श केंद्र (आईसीटीसी) स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों में जांच में एचआईवी पॉजीटिव पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को एआरटी (एंटी रिट्रोवायरल थेरेपी) बरेली भेजा जाता है।
महकमे के रडार से दूर हो रहे एचआईवी संक्रमित
जिले में एचआईवी संक्रमितों की पहचान को करीब पांच साल पहले भारतीय ग्रामोत्थान सेवा विकास संस्थान एनजीओ को जिम्मेदारी दी गई थी। यह एनजीओ जिले के हाई रिस्क एरिया में जाकर ड्रग यूजर, सेक्स वर्कर्स आदि से संपर्क कर एचआईवी संक्रमितों की पहचान कर उन्हें काउंसिलिंग के लिए प्रेरित करता था, लेकिन दो साल पहले यह एनजीओ बंद कर दिया गया। ऐसे में अब जिले के एचआईवी संक्रमित सेहत महकमे की पकड़ से बाहर होते जा रहे हैं। वहीं आईसीटीसी में केवल उन्हीं की जांच होती है जो अपनी मर्जी से पहुंचते हैं।
वर्जन:
जिले में एचआईवी संक्रमितों की जांच को दो आईसीटीसी सेंटर बने हैं। पूर्व में एक एनजीओ वर्क करता था, लेकिन उसे बंद कर दिया गया। अब मा आईसीटीसी सेंटर पर आने वालों की जांच की जा रही है।
डॉ. महावीर सिंह, आईसीटीसी प्रभारी।