मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का बोलबाला, जानकारी देने के लिए उपलब्ध नहीं रहते कर्मचारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी से मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी के पास बनी हेल्पडेस्क पर मरीजों को मदद नहीं मिल रही। ऐसे में जानकारी के लिए मरीज इधर-उधर भटकते हैं। जांच कराने लैब पहुंचने वाली महिला मरीजों को पुरुषों की लाइन में लगना पड़ता है। कई अन्य काउंटरों पर भी महिला-पुरुष एक ही लाइन में दिखते हैं।
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज तो बना दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं जस की तस हैं। इलाज और सही जानकारी के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। इमरजेंसी के पास बनी हेल्पडेस्क के कर्मचारी अधिकतर समय नदारद रहते हैं। किस डॉक्टर और किस कमरे में इलाज होगा, मरीजों को यह जानकारी नहीं मिल पाती।
सिर्फ ओपीडी के पास बने पूछताछ केंद्र पर मरीजों को थोड़ी-बहुत जानकारी मिलती है। बुधवार की सुबह 11 बजे इमरजेंसी के पास बने पूछताछ केंद्र पर भी कर्मचारी नजर नहींं आए।
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डीएम के निर्देश पर बनी थी हेल्पडेस्क
करीब 10 दिन पहले एक प्रसूता का ओपीडी के बाहर सड़क पर बनी बेंच के पास प्रसव कराया गया था। मामले में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही सामने आई थी। डीएम ने सीएमओ को मामले की जांच और इमरजेंसी के पास हेल्पडेस्क बनाए जाने का निर्देश दिया था। जिससे मरीजों को सही जानकारी मिल सके। जिम्मेदारों ने इमरजेंसी के पास पूछताछ केंद्र तो बना दिया, लेकिन यहां पर स्वास्थ्यकर्मी नजर नहीं आते।
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लैब के सामने पुरुषों की लाइन में धक्के खाती हैं महिला मरीज
मेडिकल कॉलेज के निचले तल पर ही लैब है। जिम्मेदारों की अनदेखी से जांच को आने वाली महिला मरीजों को पुरुषों की लाइन में धक्के खाने पड़ते हैं। बुधवार को लैब के सामने मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। इस लाइन में कई महिला मरीज भी थीं। यही नहीं कई अन्य काउंटरों पर भी एक ही लाइन नजर आई।
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व्यवस्थाओं को सुधारा जा रहा है। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही व्यवस्था और बेहतर कर दी जाएगी। कोशिश है कि मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
- डॉ संगीता अनेजा, प्राचार्य, मेेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज में हेल्प डेस्क पर मौजूद लोग । संवाद