पीलीभीत। मंकीपॉक्स को लेकर शासन की सख्ती के बाद जिले में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसके लिए जिला अस्पताल में पांच स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं। प्रत्येक वार्ड में चार बेड की व्यवस्था की गई है। अभी तक मंकी पॉक्स से संबंधित कोई मरीज सामने नहीं आया है। लक्षण मिलने की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग और सीएमओ को अवगत कराने के हिदायत दी गई है।
दिल्ली में मंकी पॉक्स का मरीज मिला था। दूसरा मरीज केरल में मिलने के बाद प्रदेश में भी सतर्कता बढ़ा दी गई। बुखार, दाने और गांठ के जरिए उभरता है। इससे दुर्लभ बीमारी माना गया है। लक्षण मिलने की स्थिति में नाक, गला और घाव के स्थान से सैंपल लिए जाएंगे। जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ भेजा जाएगा। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत के मुताबिक मंकीपॉक्स वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है। इसका इलाज कराएं। पशु जनित बीमारी मंकी पॉक्स दो से चार सप्ताह में ठीक हो जाती है। दरअसल स्थानीय स्तर पर वायरस का प्रकोप कम हैं लेकिन संक्रमण वाले क्षेत्र से आने वालों पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग मंथन में जुटा है। सीएमओ डॉ आलोक कुमार ने बताया कि मंकीपॉक्स को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। विभागीय स्तर पर जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
कपड़ों की साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखें।
उचित दूरी बरतने के साथ मास्क लगाएं
हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ रखें।
घावों होने पर उसे ढककर रखें।
बुखार आने पर पैरासिटामॉल लें।
पानी अधिक पीए और पौष्टिक आहार लें।