पीलीभीत के अमरिया थाने में तैनात महेंद्र यादव दो साल पहले ही दरोगा बना था। उसकी नौकरी को भी दो साल ही बचे थे, लेकिन चंद रुपयों की खातिर अपना ईमान बेच दिया और खाकी वर्दी को भी दागदार कर दिया। एंटी करप्शन बरेली की टीम ने सोमवार को दरोगा को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
एक महिला ने बीते नवंबर में ही अदालत के आदेश पर सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा अमरिया थाने में दर्ज कराया था। दरोगा महेंद्र यादव आरोपियों से रिश्वत मांग रहे थे। दरोगा महेंद्र यादव आजमगढ़ का रहने वाला है। रिश्वत देने लेने के लिए उसने युवक को अपने कमरे में ही बुलाया था। यहां युवक ने उसे रुपये दिए। इससे पहले इन नोटों पर एंटी करप्शन की टीम ने पाउडर लगा दिया था। साथ ही नंबर नोट कर लिए थे। जिलाधिकारी के यहां से दो गवाह भी टीम साथ लेकर पहुंची थी। रिश्वत लेने के बाद दरोगा जैसे ही कमरे से बाहर निकला, टीम ने उसे पकड़ लिया।
इसका पता चलने पर अमरिया थाने में खलबली मच गई। जब तक अमरिया थाने की पुलिस दरोगा के आवास पर पहुंची तब तक टीम उन्हें लेकर जा चुकी थी। देर रात तक एंटी करप्शन की टीम सुनगढ़ी थाने में लिखापढ़ी करती रही। दरोगा के खिलाफ सुनगढ़ी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तहरीर दी गई। दरोगा को इंस्पेक्टर के कक्ष में बंद रखा गया। वहां किसी को आने जाने नहीं दिया गया। सुनगढ़ी इंस्पेक्टर संजीव शुक्ला ने बताया कि एंटी करप्शन के दरोगा की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
एसपी अतुल शर्मा ने बताया कि दरोगा को निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। एंटी करप्शन की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।