गोमती रिवर फंड का पैसा मात्र लखनऊ में ही नहीं, बल्कि पीलीभीत जनपद में भी ठिकाने लगाया गया। यहां यह धनराशि हेड वर्कर्स खंड की प्रथम सबडिवीजन वनबसा व द्वितीय सबडिवीजन बाइफरकेशन से जुड़ी हरदोई ब्रांच में सिल्ट सफाई व डौला बनाने के नाम पर खर्च कर खानापूरी की गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी ने लखनऊ में गोमती रिवर फंड से कराए गए कार्यों की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन कम लोगों को ही इस बात की जानकारी होगी कि गोमती रिवर फंड की धनराशि को ठिकाने लगाने के लिए अपने जिले में कुछ कार्य दर्शाकर खानापूरी की गई। जानकारों की मानें तो हेड वर्कर्स खंड शारदा की द्वितीय शाखा बाइफरकेशन में सत्ता से जुड़े ठेकेदारों ने हरदोई ब्रांच नहर की मरम्मत व सिल्ट सफाई के नाम करोड़ों रुपये खर्च किए। उक्त नहर के रख रखाव के नाम पर भी कई करोड़ रुपये खर्च कर दिये गए। बताते हैं कि इसमें अभियंताओं ने सत्ता का फायदा उठाते हुए टेंडर प्रक्रिया से लेकर मरम्मत कार्यों के नाम पर भी भारी गड़बड़ी की। इन दिनों हरदोई ब्रांच नहर सूखी पड़ी है। इस नहर में करोड़ों रुपये की सिल्ट सफाई किस स्तर की हुई थी, इसको अंदाजा नहर के भीतर लगे सिल्ट के ढेर देखकर लगाया जा सकता है। चूंकि गोमती रिवर फंड से हरदोई नहर पर मात्र जनपद में ही नहीं, बल्कि रायबरेली, उन्नाव समेत कई जनपदों में कार्य कराया गया। इसलिए अभियंता अपनी मनमर्जी से कार्य कराते रहे। इस तरह गोमती रिवर फंड की धनराशि को कई जनपदों में सत्ता से जुड़े अभियंताओं ने आसानी से ठिकाने लगा दिया। इधर अब मुख्यमंत्री योगी की जांच के आदेश के बाद अभियंताओं में हड़कंप मचा हुआ है।