कथावाचक ने कहा कि संत ईश्वर के प्रतिबिंब होते है। संतों की शरण में जाने से इंसान का मन ईश्वर की उपासना में बड़ी आसानी से लग जाता है। सभी लोगों को ईश्वर की उपासना अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। जिस प्रकार लोग अपनी दिनचर्या के अन्य कार्य करते हैं, उसी प्रकार ईश्वर की उपासना भी करनी चाहिए। आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम समापन हो गया। समापन के बाद कथावाचक को विदाई दी गई। कार्यक्रम की व्यवस्था में लखन मिश्रा, कृष्णाऔतार रस्तोगी, रमाशंकर अग्रवाल और कपिल अग्रवाल आदि लोगों का विशेष सहयोग रहा।