वन विभाग में अब निजी भू्मि पर खड़े पेड़ों के कटान और निकासी परमिट लेने में किसानों को लंबे समय तक विभाग के चक्कर नहीं लगाने होंगे। शासन ने कटान माफियाओं के खेल पर अंकुश लगाने और परमिट देने में पारदर्शिता लाने के लिए अब ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था शुरू की है। विभाग कटान परमिट को विभागीय वेबसाइट पर भी अपलोड करेगा, ताकि कहीं भी अधिक वृक्ष काटे जाने की सूचना विभागीय अफसरों तक पहुंच सके।
काश्तकारों की निजी जमीन पर खड़े पेड़ सामाजिक वानिकी की अनुमति से काटे जाते हैं। इसमें फलदार पेड़ों के कटान परमिट लेने के लिए वृक्षों का स्वामी या ठेकेदार फाइल तैयार कर वन विभाग के दफ्तर जाता था, जिसके बाद डीएफओ संबंधित रेंज के रेंजर से इसकी रिपोर्ट लेते थे। रिपोर्ट मिलने के बाद कटान होने वाले वृक्षों की संख्या के मुताबिक प्रति वृक्ष जमानत धनराशि जमा की जाती थी। संख्या से अधिक पेड़ काटने पर आवेदनकर्ता की जमानत धनराशि जब्त हो जाती थी।
अब परमिट लेकर अधिक पेड़ काटना होगा मुश्किल
आमतौर पर किसान के बजाए ठेकेदार ही किसान के पेड़ खरीदकर कटवा लेते हैं। ऐसे में तमाम तरह के खर्चों से बचने को वह कम पेड़ों का परमिट लेकर साठगांठ कर अधिक पेड़ काट लेते थे। इस तरह की शिकायतें लंबे समय से शासन तक पहुंच रही हैं।
अब खुलेगी ठेकेदारों की पोल
प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा जो पहले पीलीभीत के डीएफओ भी रह चुके हैं, उन्होंने कटान परमिट में पारदर्शिता लाने को अब पेड़ों के कटान परमिट को ऑनलाइन व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था एक मार्च से लागू भी हो चुकी है। उन्होंने परमिटों को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करना भी अनिवार्य कर दिया है। अब कम पेड़ों का परमिट लेकर अधिक पेड़ काटने पर ठेकेदार की पोल कहीं पर भी खुल सकती है।
हरियाली के कातिलों की भी हो सकेगी पहचान
हरियाली के कातिलों द्वारा फलदार वृक्षों का सफाया करने पर विभाग की वेबसाइट पर इसकी जानकारी डीएफओ और संबंधित आला अफसरों को दी जा सकती है। इस ऑनलाइन व्यवस्था से यह फायदा तो होगा ही, साथ ही चक्कर लगाने के बजाए मात्र एक बार परमिट की कापी लेने के लिए डीएफओ के कार्यालय में जाना पड़ेगा।
कटान परमिट की ऑनलाइन व्यवस्था से किसानों को बड़ा फायदा होगा। वह अपनी जरूरत के मुताबिक आसानी से पेड़ों के कटान परमिट ऑनलाइन आवेदन कर प्राप्त कर सकते हैं।
- मोहम्मद हसीन, रेंजर, सामाजिक वानिकी।