पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने जिले में बाघों के हमलों की बढ़ रहीं घटनाओं पर अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहे वन महकमे और उनके कुछ सिपहसलारों पर अपनी कमी छिपाने के लिए मुआवजे की खातिर घर के बूढ़े लोगों को जंगल भेजने संबंधी की गई गलत बयानबाजी की कड़े शब्दों में निंदा की है। पूर्व मंत्री ने कहा कि अपने को पर्यावरण विद कहलाने वाले कलीम अतहर ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि जंगल किनारे बसे गांव के लोग मुआवजे की खातिर अपने घर के बुजुर्गों को जंगल भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका यह बयान मानवता को शर्मशार करने वाला है। हेमराज वर्मा ने कहा कि ऐसे बेतुके व गैरजिम्मेदराना बयान देकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वह वही भाषा बोल रहे हैं जो वन विभाग उनसे बोलवा रहा है। जिससे पीड़ित परिवारों को मुआवजा न देने पड़े साथ ही वन महकमे की खामियों की जवाबदेयी से भी बचा जा सके। हेमराज वर्मा ने कहा कि ऐसा प्रचारित कर वन महकमा अपनी कमियों पर पर्दा डाल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों की जितनी भी निंदा की जाए कम नहीं है। पूर्व मंत्री ने कहा कि आठ जुलाई को टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर जंगल किनारे स्थित गांवों के लोगों को बाघ के आतंक से निजात दिलाने, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर वह अपनी अगुवाई में धरना देंगे। उन्होंने कहा कि जब तक जंगल किनारे बसे गांवों की जनता को वह न्याय नहीं दिलाते चैन से नहीं बैठेंगे।