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Pilibhit News: वन विभाग का दावा- जंगल से बाहर नहीं निकला बाघ

Fri, 18 Aug 2023 12:05 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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कलीनगर। बाघ के हमले में रानीगंज गांव के किसान राममूर्ति लाल की मौत को टाइगर रिजर्व प्रशासन जंगल के अंदर होना बता रहा है, वहीं परिजन दावा कर रहे हैं कि बाघ राममूर्ति को खेत से ही खींचकर कर ले गया था। घटना के बाद से परिजन बदहवास हैं। वे मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों के दावे से लगता है कि वे मुआवजा देने के मूड में नहीं हैं।
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माधोटांडा क्षेत्र के गांव रानीगंज निवासी राममूर्ति लाल के तीन पुत्र हैं। माला जंगल की सीमा से सटा उनका चार बीघा खेत है। मंगलवार को फसल में दवा का छिड़काव करने के लिए राममूर्ति अपने पुत्र चंद्रपाल के साथ खेत गए थे। बुधवार सुबह जंगल में तीन सौ मीटर अंदर राममूर्ति का अधखाया शव मिला। बाघ भी वहीं बैठा था।
राममूर्ति को तलाशते हुए जब गांव वाले जंगल में घुसे तो आहट पाकर बाघ राममूर्ति के शव को मुंह में दबाकर भागने लगा। ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए पीछा किया तो वह शव छोड़कर भाग गया। बेटे सुमेर लाल का कहना है कि बाघ जंगल से निकलकर खेत से ही राममूर्ति को उठाकर ले गया था। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि विभाग जांच कर मामले में मुआवजा देने की प्रक्रिया पर अमल करे। ताकि मृतक के परिजनों को मदद मिल सके।
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इधर, वन विभाग के अफसरों का दावा है कि बाघ जंगल से बाहर नहीं निकला। उनका कहना है कि राममूर्ति ही जंगल के अंदर गए थे। उन्हें खेत में बाघ के पगचिह्न नहीं मिले, न ही खेत में कहीं खून मिला। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि घटना के दिन करीब सौ-डेढ़ सौ लोग खेत से होते हुए जंगल गए थे, ऐसे में पगचिह्न कैसे मिल सकते हैं।
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वन अफसरों के दावे से गुस्से में हैं ग्रामीण
फोटो 31
जंगल सीमा से सटे इलाके में खेत हैं। आने-जाने का रास्ता भी जंगल से सटा है। राममूर्ति को बाघ खेत से ही खींचकर जंगल में ले गया। ऐसे में परिजनों को मुआवजा मिलना ही चाहिए। - गुरदीप सिंह गोगी, मथना जपती
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एक माह पहले से ही क्षेत्र में बाघ की दहशत है। मंगलवार को भाई राममूर्ति खेत पर ही कम कर रहे थे। बाघ खेत से ही उठाकर उन्हें जंगल में ले गया। विभाग को नियमानुसार मदद करनी चाहिए। - सुम्मेर लाल, मृतक के भाई


बाघ की नहीं दिखा कोई चहलकदमी
किसान की मौत के बाद से टाइगर रिजर्व की माला रेंज के वन कर्मियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। रेंजर ने तीन टीमों को बाघ की निगरानी के लिए लगाया है। टीमों का दावा है कि बुधवार से लेकर बृहस्पतिवार शाम तक बाघ की जंगल से बाहर चहलकदमी नहीं देखी गई। अमूमन शिकार के बाद बाघ वहीं आसपास रहता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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वर्जन

जांच कराई जा रही है। अभी तक बाघ के जंगल से बाहर निकलने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर
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