हाथियों से बाघ की निगरानी करते वनकर्मी। स्रोत - विभाग
पीलीभीत। बासखेड़ा गांव में बाघ के हमले में किसान की मौत की घटना के बाद गंभीर हुए वन अफसरों ने दो टीमों की तैनाती करने के साथ पांच कैमरे लगाकर हमलावर बाघ की निगरानी शुरू कर दी है। इधर, घटना के बाद से शुक्रवार शाम तक बाघ की कोई चहलकदमी दिखाई नहीं दी। शुक्रवार को डीएफओ मनीष सिंह ने टीम के साथ गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की।
माधोटांडा क्षेत्र के गांव बासखेड़ा में बुधवार रात खेत पर पानी लगाते समय किसान पूरनलाल को बाघ ने हमला कर मार दिया था। किसान का अधखाया शव 250 मीटर दूर गन्ने के खेत से बरामद हुआ था। आक्रोश के बीच अफसरों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने शव को उठाने दिया था।
इधर घटना को डीएफओ मनीष सिंह ने गंभीरता से लिया। दो टीमों का गठन कर निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा जंगल सीमा पर बाघ की चहलकदमी वाले स्थानों पर पांच कैमरे लगाए गए।
टीम को 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बृहस्पतिवार रातभर टीम क्षेत्र में सक्रिय रही। दावा किया जा रहा है कि बाघ की क्षेत्र में कोई चहलकदमी नहीं दिखाई दी। शुक्रवार को डीएफओ मनीष सिंह, रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव व माला रेंजर रोबिन सिंह के साथ गांव पहुंचे। मृतक के परिजनों से मुलाकात कर हाल जाना। हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। वन्यजीवों से संबंधित जानकारी देकर जागरूक भी किया।
दो हाथियों बड़ा सूर्या और मणिकांत ने भी संभाला मोर्चा
डीएफओ के निर्देश पर दो टीमों और पांच कैमरे लगाने के अलावा निगरानी के लिए दो हाथियों को भी लगाया गया है। शुक्रवार सुबह दोनों हाथियों बड़ा सूर्या और मणिकांत को घटना से संबंधित जंगल सीमा पर लाया गया।