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गेहूं खरीद में फिर शुरू हो गई आंकड़ेबाजी

Sun, 14 May 2017 10:36 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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 गेहूं खरीद में आंकड़ेबाजी का खेल शुरू हो गया है। व्यापारियों और बिचौलियों के पास जमा गेहूं को सरकारी अभिलेखों में चढ़ाकर खरीद का प्रतिशत बढ़ा जाया जा रहा है। शायद यही कारण है कि जहां 40 दिन में मात्र 44 हजार मीट्रिक टन गेहं खरीद हुई थी वह चार दिन में एकाएक बढ़कर 58 हजार मीट्रिक टन हो गई। सरकारी गेहूं खरीद के नाम पर हर साल बड़ा गोलमाल जिले में होता रहा है। कागजों में माल को इधर से उधर कर सरकारी खरीद बढ़ाई जा रही है। सरकारी खरीद के आंकड़े ऐसे समय में बढ़ रहे हैं जबकि किसान के पास गेहूं लगभग समाप्त हो गया है। प्रारंभ में जब तक किसान के पास गेहूं था तब तक अव्यवस्थाओं एवं नमी की मात्रा अधिक बताकर खरीद नहीं की गई। अब जबकि किसानों का गेहूं व्यापारियों, आढ़तियों एवं बिचौलियों के पास पहुंच गया है तो खरीद बढ़ रही है। आकड़ेबाजी का ही कमाल है कि जहां एक अप्रैल से 10 मई तक 40 दिन में मात्र 44 हजार मीट्रिक टन थी वह चार दिन में बढ़कर 58 हजार मीट्रिक टन पहुंच गई। दरअसल गेहूं खरीद के इस खेल में अब व्यापारियों द्वारा कम दाम में खरीद कर रखे गए गेहूूं को ही किसान के नाम दर्शाकर सरकारी रेट के हिसाब से भुगतान कराया जा रहा है। इसे किसान से की गई खरीद दर्शाकर भुगतान भी व्यापारी के परिचित किसान के खाते में ही भेजा जाता है, जिसे बाद में विड्राल कराकर वापस ले लिया जाता है। कई व्यापारियों के पास तो फर्जी किसानबही हैं तो कुछ ऐसी किसान बही हैं जो व्यापारियों के निकट संबंधियों, पत्नी, बच्चों तक के नाम हैं।
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